एक गाँव में एक पाखंडी साधु का वेश बना कर रहता था । वह लोगों को भविष्य की उलटी - सीधी बातें बताकर ठगता रहता था । गाँव वाले उसकी बातों पर विश्वास करने लगे । साधु ने काफी धन जोड़ रखा था । प्रतिदिन रात में वह उस रकम को गिनता । दूसरे दिन शहर जाकर उसके बदले चाँदी के सिक्के ले आता ।
इस तरह उसने चाँदी के सौ सिक्के जोड़ लिए । एक रात वह अपनी कुटिया में बैठा , चाँदी के सिक्कों को गिन रहा था । तभी छज्जू नाम का किसान उधर से गुजरा । उसने सिक्कों की खनखनाहट झोंपड़ी में सुनी , तो चौंककर रुक गया । उसने झोंपड़ी में झांककर देखा , साधु चाँदी के सिक्के गिन - गिनकर एक हांडी में रखता जा रहा है ।
अरे , इसके पास इतना धन ! " - छज्जू चौका । मन ही मन कुछ सोचता , वह घर लौट आया । छज्जू को उस रात नींद नहीं आई । वह सोचता रहा - ' इस पाखंडी ने गाँव वालों को मूर्ख बनाकर यह धन इकट्ठा किया है । यह खाना माँगकर खाता है , फिर धन का क्या करेगा ?
इस लालची को सबक सिखाना चाहिए । ' दूसरे दिन सुबह ही वह साधु की कुटिया पर गया । साधु को भोजन के लिए निमंत्रित किया । साधु को भला इसमें क्या आपत्ति हो सकती थी । उसने तुरन्त हामी भर दी । छज्जू घर लौटकर साधु के भोजन का प्रबंध करने लगा ।
छज्जू की पत्नी भली औरत थी । उसने साधु के लिए हलुआ - पूरी बनाकर रख दिये । दोपहर हुई , तो साधु अपना कमंडल लेकर आ धमके । “ आइए , महाराज ! धन्य भाग्य हमारे ! हमारी कुटिया पवित्र कीजिए । " - छज्जू ने साधु का स्वागत करते हुए कहा । ‘ जय शंकर ! भगवान तेरा भला करें ! "उसने संत बनते हुए कहा " भक्त , इसकी क्या जरूरत थी ! हम संन्यासी तो रूखा - सूखा खाते हैं । " '
महाराज , मेरी पत्नी ने बड़े प्रेम से यह सब बनाया है । आप तृप्त हो जाएँ , तो हमारे पुण्य जाग उठेंगे । शुरू कीजिए ! " साधु जी खाने के बैठ गए । कुछ ही समय में पूरा का पूरा खाना ख़त्म कर दिया। छज्जू और उसकी पत्नी साधू पैर पखारे । फिर एक सौ एक रुपया दक्षिणा के रूप में देकर उनको विदा कर दिया।
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| story of a monk |
साधु कुटिया पर आकर सो गया । आज उसने भोजन कुछ अधिक ही कर लिया था । उधर शाम को छज्जू अचानक अपने घर के बाहर आकर चीखने लगा- " हाय , मैं लुट गया । बर्बाद हो गया । " इतना कहकर वह जोर जोर से रोने लगा । रोने की आवाज सुन , आस - पड़ोस के लोग इकट्ठे हो गये । रोने का कारण पूछने लगे । छज्जू रो - रोकर बतलाने लगा
महाराज से अपने बैल वापस लाने के लिए थोड़ी देर पहले हांडी में सौ चाँदी के सिक्के गिनकर रखे थे । वहाँ जाने से पहले मैंने हंडिया में सिक्के देखे , तो हांडी खाली है । " पड़ोसी यह सुनकर सन्न रह गये । वे बोले- " क्या कोई बाहर का आदमी घर में आया था ? "
छज्जू उसी तरह मुँह लटकाए बोला- " बाहर का आदमी कौन आता ? घर में बीवी के अतिरिक्त कोई नहीं था । हाँ , दोपहर में कुटिया वाले बाबा जरूर आए थे । " - " वह क्या घर के अंदर भी गए थे ? " - " हाँ , मेरी घरवाली ने एक साधु को भोजन के लिए कहा था । मैं बाबा जी को बुला लाया । उनके अलावा कोई नहीं आया । " "
घबराओ नहीं ! चलकर उस साधु की तलाशी लेते हैं । इन साधुओं का कोई भरोसा नहीं । " - भीड़ में से किसी ने कहा । “ नहीं , भाई ! ऐसा मत कहो । वह साधु ऐसे नहीं है । पूरा गाँव उनकी पूजा करता है । मुझे पाप लगेगा । " - छज्जू घबराने हुए बोला । मगर भीड़ में कौन किसकी सुनता है ? थोड़ी ही देर में सब कुटिया पर पहुँच गए ।
शोर सुनकर साधु बाहर आया । पूछने लगा , क्या बात है ? मगर भीड़ तो तलाशी लेने पर तुली थी । दो - तीन लोग उसे धक्का देकर अंदर भी घुस गए । साधु का सारा सामान उन्होंने उलट - पुलट डाला । किसी की नजर कोने में रखी हांडी पर गई । उसने हांडी उठाई , तो खन् - खन् की आवाज हुई ।
लोगों ने देखा , उसमें चाँदी के सिक्के थे । छज्जू यह देखते ही खुशी से चीख पड़ा- " मिल गए मेरे रुपए ,मिल गए । भगवान ने मेरी सुन ली । अब मेरे बैल मिल जायेंगे । " साधु की समझ में कुछ न आ रहा था । लेकिन जब उसने देखा , उसने चाँदी के सिक्कों को छज्जू अपने सिक्के बता रहा है , तो वह चक्कर में पड़ गया ।
क्रोधित भीड़ में एक युवक ने साधु की दाढ़ी पकड़ ली- " क्यों , साधु महाराज ! अब चोरी भी करने लगे । मुँह में राम , बगल में छुरी । " “ भाइयो , इस साधु को मैंने आज खाना खिलाया , दक्षिणा दी । लेकिन मुझे क्या मालूम था , यह चोर है ।
मैंने सौ चाँदी के रुपए जमा कर रखे थे । यह रुपए मेरे ही हैं । यकीन न हो , तो गिनकर देख लो । " - छज्जू बोला । चाँदी के सिक्के गिने गए । वे पूरे सौ निकले । अब तो लोगों को पूरा विश्वास हो गया कि सिक्के छज्जू के ही हैं ।
फिर क्या था । भीड़ ने अच्छी तरह साधु की खबर ली । वह बेचारा बिना कमंडल उठाए ही भाग गया । छज्जू सबके साथ लौट आया । घर आकर छज्जू ने लोगों से कहा- " भाइयो , यह साधु लालची व ढोंगी था । इसे यहाँ से भगाने के लिए मुझे यह चाल चलनी पड़ी । ये रुपये साधु के ही हैं ।
लेकिन यह उसकी मेहनत की कमाई नहीं । उसने यह रकम हम सब लोगों को बहकाकर इकट्ठी की थी । हम मे से लोग है । कभी चाँदी के सौ रुपए नहीं देखे , रुपए सहेजकर रखने ठहरा गरीब की तो बात ही क्या ? ये रुपए आप लोग आपस में बाँट लें । "
भीड़ ने जब यह सुना , तो दंग रह गई । मंगल बोला- " शक तो मुझे भी साधु पर हो रहा था , लेकिन लोगों की श्रद्धा व विश्वास देख , मैं चुप रह गया था । आज तुमने हम लोगों की आँखें खोल दीं । " सबने छज्जू की वाहवाही की । तय हुआ कि यह सारी रकम गाँव स्कूल को दे दी जाए , ताकि बच्चों के लिए नई टाट - पट्टी खरीदी जा सकें । यह निर्णय सुनकर सब खुशी - खुशी अपने घर लौट गए ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उत्तर क्या है?
पाखंडी का उदाहरण क्या है (What is an example of a hypocrite)
पाखंडी व्यक्ति वह होता है जो झूठ बोलता है और दूसरों को धोखा देता है ताकि वह अपना मत या विचार सच्चा बताने में सफल हो सके। यह व्यक्ति अक्सर दूसरों के विचारों का मजाक उड़ाता है या उनको नीचा दिखाने की कोशिश करता है।
यहाँ कुछ पाखंडी के उदाहरण हैं:
एक व्यक्ति दूसरों को बताता है कि वह बहुत अच्छी तरह से अपने बच्चों की देखभाल करता है, लेकिन वास्तविकता यह होती है कि वह उनकी देखभाल का जिम्मेदारी नहीं उठाता हैं.
पाखंडी व्यक्ति का क्या अर्थ है (What is the meaning of hypocrite person)
पाखंडी व्यक्ति एक ऐसा व्यक्ति होता है जो अपने आप को बेहद धोखेबाज तरीके से प्रदर्शित करता है। वह दूसरों को धोखा देने में आसानी से सक्षम होता है और उनसे फायदा उठाने का प्रयास करता है। इस तरह के व्यक्ति अपनी बातों में और व्यवहार में असली नहीं होते हैं और उनकी सोच और कार्यक्षेत्र का दोहन होता है। वे बेशर्मी से झूठ बोलते हैं और दूसरों को गुमराह करते हैं। ये व्यक्ति अक्सर अपने लाभ के लिए लोगों को धोखा देते है
पाखंडी शब्द कहां से आया है (Where did the word hypocrite come from)
पाखंडी शब्द का अर्थ"पाखंडी" शब्द हिंदी भाषा से उत्पत्ति लिया हुआ है। इस शब्द का उल्लेख पहली बार संस्कृत में हुआ था, जहां "पाखण्ड" शब्द का उपयोग होता था जिसका अर्थ होता था "धोखा" या "मिथ्या दिखावा"। इस शब्द का उपयोग अधिकतर उन लोगों के लिए होता है जो अपनी बातों में असत्य बोलते हैं या फिर जो झूठी तरीके से अपने आप को दिखाते हैं।
पाखंड का दूसरा शब्द क्या है (What is another word for hypocrisy)
पाखंड का दूसरा शब्द है 'झूठ'।
पाखंडी को इंग्लिश में क्या कहते हैं (What is hypocrite called in English)
पाखंडी को अंग्रेजी में "hypocrite" कहते हैं।
पाखंड को सरल शब्दों में क्या कहते हैं (What is hypocrisy in simple words)
पाखंड को सरल शब्दों में "दोगलापन" या "ढोंग" कहा जा सकता है।
क्या पाखंडी होना अच्छा है (Is it good to be a hypocrite)
नहीं, पाखंडी होना अच्छा नहीं होता। पाखंडी होना अर्थात् दोगलापन या ढोंग करना असंगत व्यवहार होता है। यह दूसरों को धोखा देने वाला व्यवहार होता है और उससे दूसरों के विश्वास और सम्मान को खतरा होता है। सही और सच्चे व्यवहार करना हमारी संज्ञाना व समाज के लिए बेहतर होता है।
पाखंडी के नाम पर क्या रखा गया है (What in the name of a hypocrite)
"पाखंडी" शब्द का अर्थ होता है झूठा, धोखेबाज या ढोंगी। इस शब्द का उपयोग वह व्यक्ति करता है जो अपनी बातों में सच्चाई नहीं बताता और दूसरों को धोखा देता है। यह एक नकारात्मक शब्द होता है और इसे दूसरों को अपमानित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
धर्म, समाज और राजनीति जैसे कुछ क्षेत्रों में लोग उन लोगों को पाखंडी कहते हैं जो धर्म और धर्मगुरुओं के नाम पर लोगों को धोखा देते हैं या जिनकी बातें वास्तविकता से दूर होती हैं
पाखंडी यकजहती का मतलब क्या होता है (What is the meaning of hypocrite yakjahti)
"पाखंडी यकजहती" एक हिंदी शब्द है जिसका अर्थ होता है "हिंसक झूठ बोलना" या "बेईमानी से काम करना"। यह एक व्यक्ति या समूह के द्वारा अपने विचारों और कार्यों को दिखाने के लिए बेईमानी और झूठ का सहारा लेने की क्रिया होती है। इससे वे दूसरों को धोखा देते हैं
पाखंडी अर्थ (hypocrite meaning)
पाखंडी शब्द का अर्थ होता है दिखावटी या झूठा। यह एक ऐसी व्यक्ति या वस्तु के बारे में कहा जाता है जो दिखावटी तरीके से कुछ करती है लेकिन असल में वह उसे करने में सक्षम नहीं होती है। इस शब्द का उपयोग आमतौर पर किसी व्यक्ति के चरित्र या किसी वस्तु के गुणों के बारे में किया जाता है जिसे वास्तविकता से अलग रखने के लिए दिखावटी या झूठी बातें कहा जाती हैं।
पाखंडी स्टेटस (hypocrite meaning in hindi,hypocrite status)
पाखंडी स्टेटस एक ऐसा स्टेटस होता है जो दिखावटी और झूठा होता है। यह सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा उपयोग किया जाता है जो खुद को एक ऐसे तरीके से प्रदर्शित करने की कोशिश करते हैं जो वास्तविकता से अलग होता है। इन स्टेटस में अक्सर भ्रम फैलाया जाता है जो लोगों को गलत दिशा में ले जाता है और उन्हें वास्तविकता से दूर ले जाता है। इसलिए, लोगों को सत्य और असली जीवन के तरीकों को अपनाने की सलाह दी जाती है और पाखंडी स्टेटस से दूर रहने की अपेक्षा की जाती है।
पाखंडी बाबा (hypocrite baba)
पाखंडी बाबा वे लोग होते हैं जो लोगों के भरोसे को उठा कर अपना फायदा पाने की कोशिश करते हैं। वे धर्म, आध्यात्मिकता या रोग ठीक करने के नाम पर लोगों से पैसे लेते हैं और उनकी भावनाओं का खेल खेलते हुए उनके सामने भविष्य के पूर्वानुमान या अन्य जादू-टोने के नाम पर बातें करते हैं। इस तरह के लोगों को आम तौर पर "पाखंडी बाबा" कहा जाता है।
पाखंडी बाबा महिलाओं का शौकीन (hypocrite baba fond of women hypocrite)
मुझे लगता है कि यह प्रश्न अत्यंत अशोभनीय है और इससे ऐसे स्थितियों में महिलाओं को अपमानित किया जा सकता है जहाँ उनके साथ अनुचित व्यवहार होता है। मैं आपको यह सलाह दूंगा कि किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म और संस्कृति की जानकारी बढ़ाने के लिए किसी भी भ्रांतियों या गलत धारणाओं को ना फैलाएं।
पाखंडी बाबा शेखचिल्ली (baba sheikhchilli)
पाखंडी बाबा शेखचिल्ली एक प्रसिद्ध किस्सेवाले थे जो उत्तर भारत में रहते थे। उन्होंने अपनी कहानियों और उपदेशों के जरिए लोगों को सत्य और ईमानदारी के महत्व को समझाया।
पाखंडी बाबा शेखचिल्ली के किस्से और कहानियां अधिकतर मजेदार थीं और उनमें एक संदेश होता था।
