ललितपुर गांव में एक सरजू नाम का किसान रहा करता था । एक बार ऐसा भी हुआ जब भारी अकाल पड़ने के बाद में जब बारिश का मौसम आया तो सरजू अपनी पत्नी से बोला - भागवान ! बरसात का मौसम आ गया है , किसी भी वक्त वारिश हो सकती है ।
लेकिन हमारे पास न तो बुआई के लिए बीज है और न जोतने के लिए बैल हैं । मेरी समझ में नहीं आ रहा कि मैं बीज और बैलों का बन्दोबस्त कहाँ से और कैसे करूं । उसकी पत्नी कुछ सोचकर बोली - आप जेठ जी के पास चले जाइये और उन्हें अपनी मजबूरी से अवगत कराइये । मुझे पूरा विश्वास है कि वे हमारी अवश्य मदद करेंगे ।
ठीक है ! मैं कल ही भइया के पास कासिमपुर चला जाता हूँ । और सुनिये हमारे पास अब कुछ ही दिनों का और अनाज शेष है । अतः जेठ जी से एक बोरी अनाज भी लेते आना । ठीक है । दूसरे दिन वह कासिमपुर अपने भाई के घर पहुँचा । राम राम भाभी ! जीते रहो भईया ! कहो अचानक कैसे आना हुआ ? रूपवती और बच्चे कैसे हैं सरजू ? भगवान के कृपा से सब कुछ अच्छा चल रहा हैं भाभी ! अरे हां ! रामू भइया कहां हैं भाभी । वह सोचने लगी कुछ दिन पहले वे ठीक ही कह रहे थे कि सरजू की हालत अच्छी नहीं है और वह किसी भी समय मदद मांगने यहाँ आ सकता है ।
यह भिखारी जरूर इसी चक्कर में आया होगा । सरजू ने पुनः प्रश्न किया । तुम खामोश क्यों हो गई , भाभी बताओ न बड़े भईया कहां हैं ? वे तो उगाही के लिए दूसरे गांव गए हैं भईया । ओह ! घर कल लौटेंगे ? आज सुबह ही गए हैं । पुनः उन्हें वापस आने में हफ्ता भर तो लग ही जायेगा ।
सरजू गहरे सोच में डूब गया । भाभी मुझसे झूठ बोल रही है । शायद इन्हें शक हो गया है कि मैं भईया से कुछ मांगने आया हूँ । अगले पल वह बोला कोई बात नहीं भाभी ! मैं भईया से एक हफ्ते बाद ही मिल लूँगा । तुम मेरे लिए अभी खाना लगाओ । मुझे बड़ी जोर से लगी हुई है ।
उसकी बात सुनकर भाभी अचानक उदास हो उठी । तुम्हें शायद मेरी बात पर विश्वास नहीं आयेगा सरजू भईया । लेकिन मैं सच बोल रही हूँ कि आज सुबह ही चक्की और चूल्हा एक चील लेकर उड़ गई । अतः अभी तक मैंने और बच्चों ने भी भोजन नहीं किया । क्या ? भला कहीं चील भी चक्की और चूल्हा लेकर उड़ सकती है । भाभी मुझे भोजन नहीं कराना चाहती । शायद इसलिए सफेद झूठ बोल रही है ।
अच्छा भाभी ! मैं अपने गांव जाता हूँ । जैसी तुम्हारी इच्छा भईया ? हाँ अगर तुम रुको तो यह घर तुम्हारा ही है । नहीं भाभी ! बेकार रुककर तुम्हें क्यों कष्ट दूँ ? और सरजू अपने भईया के घर से निकल गया , रास्ते में राम राम काका ! कैसे हो ? भगवान की दया से खुश हूँ सरजू बेटा , लेकिन तुम यहाँ कब आए ? कुछ देर पहले ही आया हूँ काका ! अच्छा अच्छा तो अब पांच - सात दिन तो रुकोगे ही ना । नाहीं काका ! ठहरना नहीं हो सकेगा , भईया से मिलने आया था , लेकिन वे दूसरे गांव गये हुए हैं , इसलिए मजबूरी है । मुझे वापस जाना ही होगा ।
यह तुमसे किसने बोल दिया कि रामू कही दूसरे गांव में गया हुआ है वह तो अपने खेतो में हल चला रहा है । मैं ठीक उसी के पास से चलता आ रहा हूँ । क्या तुम सच बोल रहे हो काका ? भला मैं तुमसे झूठ क्यों बोलूंगा बेटा ? और सरजू ने रामू से मिलने का निश्चय कर लिया फिर सरजू अपने भाई के खेत की ओर चल पड़ा ।
बड़े भईया मुझे बहुत चाहते हैं वह मेरी मदद जैरूर करेंगे । जब वह अपने भाई के खेत पर पहुँचा । अरे सरजू मेरे भाई ! ओह , बड़े भईया ! मुझे विश्वास था सरजू कि तुम जल्दी ही मेरे पास आओगे । अरे हां , तुम घर होकर आ रहे हो या सीधे मेरे पास ही चले आ रहे हो सरजू । घर से होकर ही आ रहा हूँ बड़े भईया | तब तो तुम भोजन करके ही आए होंगे । नहीं ! भाभी ने भोजन कराया ही नहीं ।
कहने लगी कि एक चील चक्की और चूल्हा को लेकर उड़ गई है । हम भी सुबह से सब भूखे ही बैठे हैं । ओह ! सचमुच तुम्हारी भाभी मक्कार और चालाक है । खैर उसे समझ लूंगा । तुम मेरे साथ घर चलो । ईश्वर के लिए मेरी खातिर भाभी से लड़ाई - झगड़ा न करना मेरे बड़े भईया | चिन्ता न करो सरजू ! मैं उससे लड़ाई - झगड़ा नहीं करूँगा बल्कि उसे ऐसा सबक सिखाऊँगा कि वह जिन्दगी भर याद रखेगी और किसी से ऐसा अशिष्ट व्यवहार नहीं करेगी ।
तब ठीक है बड़े भईया ! आइए चलें चलते - चलते सरजू ने आने का कारण बताया । आप यह तो जानते ही होंगे कि पिछले वर्ष हमारे गांव में अकाल पड़ा था । अब इस साल वर्षा सिर पर है लेकिन मेरे पास बुआई और जुताई के लिए कोई साधन नहीं है मुझे बीज , बैल और एक बोरी अनाज भी चाहिए ।
तुम चिन्ता मत करो छोटे ! मैं सब प्रबन्ध कर दूँगा । कहने को तो रामू ने कह दिया लेकिन वह फिर मन - ही - मन सोचने लगा । अगर सरजू की भाभी को मैं यह कहूँगा कि सरजू को बीज और बैल एक बोरी अनाज देना है तो वह घर में हंगामा खड़ा कर देगी । मरने - मारने को तैयार हो जायेगी । सरजू की मदद हरगिज नहीं करने देगी ।
इसलिए मुझे कोई दूसरा उपाय करना होगा । उसे सोच में डूबा देख ..... आप क्या सोचने लगे बड़े भईया ? सुनो सरजू ! अब मैंने तुम्हारे साथ घर जाने का इरादा बदल दिया है तुम ऐसा करो , गांव के बाहर जाकर मेरा इन्तजार करो मैं जल्द ही तुम्हारा बताया हुआ सारा सामान लेकर वहाँ खेत पर ही पहुँचा रहा हूँ । ठीक है बड़े भईया ! जैसा आप उचित समझें । कहकर सरजू गांव के बाहर की तरफ चल पड़ा और रामू अपने घर पहुँचा । क्या बात है जी आज आप इतने जल्दी क्यों आ गए और इतने परेशान व उदास क्यों हैं ?
कुछ न पूछो भाग्यवान ! बस कुछ मत पूछो ! आखिर हुआ क्या है जी ? कुछ बताइये भी तो सही । अब मैं तुम्हें क्या बताऊं भाग्यवान , सुनोगी तो तुम्हारा सीना फट जाएगा । खैर सुनो - मैं सीधा तुम्हारे भाई के घर से चला आ रहा हूँ । कल तुम्हारे भाई के घर में आग लग गई और सब कुछ जलकर भस्म हो गया । एक भी चीज बाकी नहीं बची ।
सुनकर रामू की पत्नी रोने - पीटने लगी । हाय राम ! यह क्या हो गया ? हमारा भाई बर्बाद और तबाह हो गया । हरे राम यह क्या हो गया । भगवान को भी क्या मेरे ही भाई का घर जलाने को मिला था । अब चुप भी हो जाओ भाग्यवान , तुम्हारे रोने धोने से भला जली हुई चीजें वापिस आ नहीं सकती हैं । ऐ जी , तुम मेरे भईया को कुछ मदद करो ना । भला मैं उनकी क्या मदद कर सकता हूँ ? कर क्यों नहीं सकते ? आप तुरंत उसके घर पे कपड़ा अनाज और जरूरत की सभी चीजे इसी वक्त भिजवा दीजिए नहो।
पत्नी की बात सुनकर रामू ने सोच में डूबने का अभिनय किया । तुम किस सोच मे डूब गए ? बुरे वक्त में अपने ही अपनों के काम आते हैं । तुम्हारा विचार जानकर मुझे खुशी हुई भाग्यवान ! तब आप खड़े - खड़े मेरा मुंह क्या ताक रहे हैं जी मैं बैलगाड़ियों में पड़ोसियों की मदद से सामान डलवाती हूँ ।
आप जल्दी से जाकर खेत से बैल को हाक लाइए । तो ठीक है तुम अपना सारा काम कर डालो ! मैं अभी खेत में बैल लेकर आता हूँ । कहकर रामू वहां से चला गया । करीब घण्टे भर बाद जब रामू वापस लौटा । क्या बैलगाड़ी में जरूरत का हर सामान डाल दिया है ? हां , जी अब आप जल्दी से बैलों को जोड़कर मेरे भईया के पास चले जाइये ।
बरसात का मौसम आ गया है । बीज रख दिया है ना कहा ना , सब रख दिया है । अब आप देर न कीजिए और जाइए , और हां .... सुनिये इस थैली में कुछ रुपए भी हैं । भईया को दे देना । अगर उसे किसी और चीज की जरूरत होगी तो बाजार से खरीद लेना । यह भी ठीक है । तुम वास्तव में समझदार हो गई हो । और शीघ्र ही रामू बैलगाड़ी लेकर ललितपुर जाने वाले रास्ते पर चल पड़ा ।
उधर सरजू गांव से बाहर एक पेड़ की छांव में बैठा भाई का इन्तजार कर रहा था । मुझे अब घर वापस लौट चलना चाहिए । अगर रामू भईया को मेरी मदद करनी होती तो अब तक वह आ चुके होते । शायद वे भाभी से खौफ खाते हैं । इसलिए तो उन्होंने मुझे गाँव के बाहर रुकने को कह दिया था ।
लेकिन जैसे की तैसे उसे दूर से एक बैलगाड़ी आती दिखाई दी । ओह शायद भईया बैलगाड़ी लेकर आ रहे हैं । जब रामू उसके निकट पहुँचा तो अपने भाई की चाहत देखकर सरजू की आँखों में आँसू आ गए । अरे , यह क्या मेरे भाई ? तुम रो रहे हो । देखो , देखो मैं तुम्हारी जरूरत का सारा सामान ले आया हूँ ।
यह तो खुशी के आँसू है भईया मैं नहीं भूल सकूंगा । इनमे एहसान वाली कोई बात नहीं रे पगले । बुरे वक्त में भाई तो भाई के काम आया करता है , इस नाते तो भाई को दूसरा बाजू भी कहा जाता है । यह कहकर रामू ने रुपये की थैली भी उसकी ओर बढ़ाई । लो सरजू ! इसमें कुछ रुपए हैं । यदि किसी और चीजों की जरूरत पड़े तो खरीद लेना । नहीं - नहीं मुझे रुपयों की कोई जरूरत नहीं है भईया । आपने हमारे जरूरत का पूरा सामान तो बैलगाड़ी में रखवा दिया है । फिर भी तुम , रख लो सरजू भाई ! तुम्हारे यह काम आयेंगे । ठीक है भइया ! आप कहते हैं तो रख लेता हूँ !
फिर सरजू अपने भाई से भावभीनी विदाई लेकर ललितपुर के लिए चल पड़ा । रामू जल्दी ही अपने घर पहुँचा तो उसकी पत्नी हैरान हो उठी । क्या बात है जी ? आप इतनी जल्दी कैसे लौट आए ? कुछ न पूछो भाग्यवान ! मेरे साथ बहुत बुरा हाल हुआ है । मेरा भईया राजी - खुशी तो है ना ? अब क्या बताऊँ भाग्यवान । इससे पहले कि मैं तुम्हारे भाई के घर पहुंच पाता , एक चील बैगलाड़ी पर झपटी और बैलगाड़ी लेकर उड़ गई । अगर मैं तुरन्त बैलगाड़ी से नहीं कूद जाता तो इस वक्त मेरी जगह मेरी लाश तुम्हारे सामने पड़ी होती ।
उसकी बात सुनकर पत्नी आग बबूला हो उठी । यह तुम क्या बकवास कर रहे हो जी ? भला कभी चील भी बैलगाड़ी को भी लेकर उड़ सकती है । अगर चील चक्की और चूल्हा लेकर उड़ सकती है तो बैलगाड़ी को भी लेकर उड़ सकती है । बोलो , हाँ या नहीं । रामू की जवान से यह बात सुनकर उसका सारा क्रोध ठंडा पड़ गया । शायद सरजू अपने भईया से मिल चुका है और ये सामान से भरी बैलगाड़ी शायद सरजू को ही दे आए हैं ।
अगले पल वह बोली ? क्या आपसे सरजू मिला था ? हाँ ! मिला तो था । तो आप जरूर सामान से भरी बैलगाड़ी अपने भाई सरजू को ही देकर आए हुए हैं । हाँ भाग्यवान ! तुम ही तो कहती थीं कि बुरे वक्त में अपने ही अपनों के काम आते हैं । अब मेरे भैया को और सामान कहां से दोगे । हमारे पास जो फालतू सामान था , वह सब मैंने बैलगाड़ी में डाल दिया था । चिन्ता मत करो , भाग्यवान तुम्हारे भाई को सामान देने की कोई जरूरत नहीं है ,
क्योंकि तुम्हारे भैया का कोई घर नहीं जला है । वह मैंने तुम्हें सही रास्ते पर लाने के लिए तुमसे मैंने झूठ बोला था । यह सुनकर उसकी पत्नी ने इत्मीनान की सांस ली । फिर रामू पत्नी को समझाने वाले अन्दाज में बोला । सुनो भाग्यवान ! अपनों के साथ कभी ऐसा सलूक नहीं करना चाहिए जैसा तुमने सरजू के साथ किया था ।
मुझे माफ कर दीजिए स्वामी । सचमुच मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई । लेकिन आज मैं आपको विश्वास दिलाती हूँ कि भविष्य में फिर मुझसे कभी कोई गलती नहीं होगी । मुझे खुशी है भाग्यवान कि तुमने अपनी गलती मान ली । अच्छा अब मैं खेत पर जाता हूँ । और रामू मुस्कुराता हुआ अपने खेतों की ओर चल दिया ।