एक कुल्हाड़ी दो राहगीर की कहानी | Friend is the one who gives enjoyment of his happiness

कुल्हाड़ी वाला कहानी
सोने की कुल्हाड़ी की एक और कहानी 

दो बटोही एक साथ कहीं जा रहे थे , अचानक उनके रास्ते में पड़ी सोने की एक कुल्हाड़ी दिखाई दी । बस , पहले बटोही ने लपककर वह कुल्हाड़ी उठा ली और कहा अहा ! मेरा भाग्य जाग उठा । मुझे यह सोने की कुल्हाड़ी मिल गई है । अब जीवन भर मैं गुलछर्रे उड़ाऊँगा और चैन की वंशी बजाऊँगा । 

यह सुनकर दूसरा बटोही बोला- कैसी बात करते तो हो भाई ? यह क्या कहते हो कि कुल्हाड़ी मुझे मिली है । यह क्यों नहीं कहते कि कुल्हाड़ी हमें मिली है ? जब हम दोनों मित्र हैं और एक साथ चल रहे हैं , तब यह कुल्हाड़ी हमदोनों को मिली है और इसमें हम दोनों का बराबर - बराबर का भाग है । कुछ समझे । पहले बटोही ने हंसकर कहा- वाह अच्छे रहे ! कुल्हाड़ी पहले मैंने देखी है और मैंने ही उठाई है । फिर इसमें तुम्हारा भाग कैसे हो । गया ? 

देखो भाई साफ बात है , कुल्हाड़ी मुझे मिली है । इसलिए मेरी है । मैं तुम्हें इसका कोई भाग नहीं दूंगा । । इस पर दूसरा बटोही कुछ न बोला । चुपचाप रास्ता चलने लगा इतने में कुल्हाड़ी का मालिक दौड़ता - दौड़ता वहां आ पहुंचा । उसने कसकर पहले बटोही का हाथ पकड़ा और गरजकर कहा- मेरी कुल्हाड़ी कहां लिए जा रहा है ? 

बस , चल मेरे साथ राजा के पास । नहीं तो मारते - मारते कचूमर निकाल दूंगा । चोर कहीं का । - अब तो पहला बटोही बहुत घबड़ाया और दूसरे बटोही से बोला , मित्र ! अब तो हम दोनों बुरे फंसे । हम न यह कुल्हाड़ी उठाते न इस विपत्ति में फंसते । दूसरे बटोही ने उत्तर दिया खूब रहे तुम भी । अभी क्या कह रहे थे कि कुल्हाड़ी मुझे मिली है और मेरी है । इसलिए मैं तुम्हें इसका कोई भाग न दूंगा । 

अब पकड़े गए तो कहने लगे कि हम दोनों बुरे फंसे अरे भाई ! यह कहो कि मैं बुरा फंसा , अब ! जाओ राजा के पास कचहरी में और भोगो सजा | भला पहला बटोही अब क्या कहता ? वह आँखों में आँसू भरकर दूसरे बटोही का मुंह ताकने लगा ।

 उसकी यह दशा देखी तो बटोही को दया आ गई और उसने कुल्हाड़ी के मालिक से कहा । देखो भाई इस बटोही ने तुम्हारी कुल्हाड़ी चुराई नहीं है । यह तो इसे रास्ते में पड़ी मिली है , इसलिए तुम इस पर चोरी का अपराध नहीं लगा सकते , मेरा कहना मानो अपनी कुल्हाड़ी ले लो और इसे छोड़ दो । कचहरी में जाओगे तो तुम भी परेशान होगे । यह परेशान होगा , नतीजा कुछ न निकलेगा ।

बात कुल्हाड़ी बाले को समझ में आ गई । उसने पहले बटोही को छोड़ दिया और कुल्हाड़ी लेकर अपना रास्ता पकड़ा , उसके बाद दूसरे बटोही ने अपने साथी से कहा - कुछ समय मित्र के साथ छल कपट करने का नतीजा बुरा ही निकलता है , जो आदमी अपने मित्र को सुख को भोग देते हुए मुंह चुराता है । वह भला उसे दुःख का भोग किस नाते दे सकता है ?

और नया पुराने