काशी का रहस्य क्या है | Miracles of Kashi Vishwanath



काशी विश्वनाथ मंदिर में भरत मुनि नाम काफी सिद्ध था महात्मा वही रहा करते थे । एक बार उनको तपोवन सीमा के समीप स्थित जंगल में देवताओं के दर्शन पाने की इच्छा जाग उठी । वे सुबह-सुबह भ्रमण को निकले हुए थे । दोपहर के समय में उन्हें हाराश का महसूस हुआ । एक साथ में पास ही बेर के दो पेड़ थे । उन्हीं के छाया में वह आराम करने लगे । 

एक वृक्ष के नीचे उन्होंने सिर रखा और दूसरे की जड़ में पैर टिका दिए । थोड़ी देर विश्राम के बाद तपस्वी वहाँ से चले गए । बेर के दोनों वृक्ष एक सप्ताह के भीतर सूख गए । सूखने के बाद दोनों वृक्ष एक ब्राह्मण के घर दो कन्याओं के रूप में पैदा हुए । जन्म के कुछ वर्ष बाद भरत मुनि एक विशेषज्ञ के घर के सामने से निकले हुए थे । 

उन्हें देखते ही दोनों लड़कियाँ उनके चरणों में गिर गई । बोली- " महात्मा जी , आपकी कृपा से हमारा उद्धार हुआ है । हमने पेड़ का जीवन त्याग मनुष्य का शरीर मिला है । " भरत मुनि के  समझ नहीं पा रहे थे उनके पकड़ में कुछ नहीं आ रहा था । उन्होंने अजमंजस से बोला- " पुत्रियों , हमने कब और किस प्रकार से तुम पर कृपा की है ? हमें तो इस विषय में कुछ नहीं मालूम हो पा रहा है ! " 

यह सुन , दोनों लड़कियों ने कहा- " पहले हम दोनों देवराज इंद्र की अप्सराएँ थीं । गोदावरी नदी के तट पर छित्रपाप नामक पवित्र तीर्थ है । वहाँ सत्यतापा मुनि कठोर तपस्या कर रहे थे । इंद्र उनकी तपस्या से विचलित हो गए । हमें आदेश दिया कि मुनि की तपस्या में विघ्न डालें । " 

बस , हम दोनों वहाँ जाकर नृत्य करने लगीं । इससे मुनि का ध्यान भंग हो गया । वह क्रोधित हो उठे । उन्होंने शाप दिया - ' तुम दोनों पेड़ बन जाओ । ' इस पर हम उनसे क्षमा माँगने लगी । " महात्मा जी का हृदय पसीज गया । उन्होंने कहा- " मैं तुम्हें शाप मुक्ति का रास्ता बताता हूँ । 

शाप भरत मुनि के आने तक रहेगा । उसके बाद तुम नारी रूप में जन्म लेगी और बाद में देवलोक जा सकोगी । " लड़कियों की बात सुनकर भरत मुनि ने उन्हें आशीर्वाद दिया और अपनी राह चले गए । दोनों कन्याएँ कुछ समय बाद देवलोक चली गई ।

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