मीठा गीत की कहानी

एक चिड़िया की कहानी


किसी हरे - भरे वन के सभी पशु - पक्षी एक साथ , मिल - जुलकर रहते थे । उनमें बेहद प्रेम था । सभी एक - दूसरे की सहायता के लिए तैयार रहते थे । घने वृक्ष की कोटर में रह रहे रकून दम्पत्ति को , एक रात अजीब तरह की आवाजें सुनाई पड़ीं । वे चिंतित से बाहर निकलकर आए । उन्होंने पाया कि वृक्ष की एक शाख तेज हवा से टूटकर , नीचे आ गिरी है । तब तक वन के और भी कई सदस्य - गिलहरी , उल्लू , खरगोश और मेढक भी वहाँ आ पहुँचे । 

उस भारी शाख के नीचे कहीं कोई घायल न हो गया हो , इसलिए वन के सभी पशु - पक्षियों की गिनती कराई गई । पता चला कि एक छोटी गौरैया अपने टूटे पंखों के साथ शाखा के नीचे घायल पड़ी थी । श्रीमती रकून ने उसे सहलाया , पुचकारा किंतु छोटी गौरैया अधेत थी । तब मेढ़कों के सरदार ने गौरैया की चोंच में फूंक मारकर , उसकी डूबती सांसों में फिर से सांस भरी । गौरैया में थोड़ी हरकत हुई । 

श्रीमती रकून उसे उठाकर अपनी कोटर में ले आई । उसके घायल डैनों का उपचार करने लगीं । धीरे - धीरे छोटी गौरैया स्वस्थ होने लगी । इस बीच वह वन के सभी सदस्यों से भी घुल - मिल गई । फिर एक रोज वह पूरी तरह स्वस्थ होकर फुदकने लगी । सभी साथियों ने उसकी हिम्मत और श्रीमती रकून के सेवाभाव की बहुत तारीफ की । साही को गौरैया की उछल - कूद बहुत भा रही थी । 

उसने छोटी गौरैया को समझाया कि वह अधिक दूर न जाए , क्योंकि दूसरे वन के बारे में उसे कुछ पता नहीं है । दूसरे वन में न तो पीने का साफ पानी है , न सांस लेने को साफ हवा । प्रदूषण के मारे वहाँ का जीवन बदतर हो चुका है । श्रीमती रकून ने भी उसे यही समझाया । छोटी गौरेया सबकी चेतावनी के बावजूद दिन उड़ती - उड़ती दूसरे वन की सीमा में जा पहुँची । वहाँ पहुँचकर उसे बहुत कष्ट हुआ । 

प्यास से व्याकुल होकर उसने कूड़े - कचरे से प्रदूषित जल को ही पीकर , अपनी प्यास बुझाई । इस वन के जीव - जन्तुओं के व्यवहार में नम्रता या मिठास का तो नामोनिशान तक न था । छोटी गौरैया को अपने वन के सभी साथी बहुत याद आए । वह अपनी मीठी आवाज में उनकी याद में कोई गीत गाने लगी । तभी एक धूर्त लोमड़ी ने उसे डपटकर चुप करा दिया । कहा- " चुप रहो । मेरी नींद खराब न करो ।  

छोटी गौरैया उदास हो गई । उसे रह - रहकर श्रीमती रकून की याद सताने लगी , जिन्होंने कितनी रातें जागकर अपनी सेवा से , उसे फिर से उड़ने के काबिल बनाया था । उधर वन में साही , एक दिन , एक जाल में फँस गया । सभी साथी उसे बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे । अचानक एक कुत्ते के भोंकने की आवाज सुनाई दी । बस फिर क्या था ! सभी साथी साही को जाल सहित ले भागे । 

खरगोश ने जब कुत्ते को शिकार की तलाश में जाल की ओर आते देखा , तो उसने कुत्ते को अपने पीछे खूब दौड़ाया । 1 उधर साही को जाल सहित लेकर , अन्य साथी भागे जा रहे थे । इस भागम - भाग में एक पेड़ से टकराकर जाल टूट गया । साही पेड़ के पास ही कहीं जा गिरा । साही को जाल में न पाकर सभी साथी चिंतित हो गए वे उसे इधर - उधर ढूँढ़ने लगे । साही जानता था कि उसके साथी , उसे न पाकर परेशान हो रहे होंगे । उसकी तलाश में भटक रहे होंगे , 

किंतु वह ऐसी स्थिति में भी न था कि अपना गंध छोड़ता । और उसके साथी उसे तुरंत ढूँढ निकालते । वह बहुत थक चुका था । निढाल पड़ा था । दूसरी ओर खरगोश ने कुत्ते को दौड़ा - दौड़ाकर भटका दिया । कुत्ता थककर वहाँ से चला गया । हालांकि इस भागदौड़ से खरगोश ने साही की जान तो बचा ली , पर उस जंगली कुत्ते के तेज नाखूनों ने खरगोश के मुलायम बाल बुरी तरह नोच डाले । 

लेकिन वह किसी तरह उसकी पकड़ से बचकर भागता रहा । भागते - भागते वह एक झाड़ी में जा छिपा । जब उसने झाड़ी से निकलने की कोशिश की , तो पाया कि झाड़ी के आगे का रास्ता पत्थर से बंद था । वह बहुत निराश हुआ । तभी उसे अचानक वहाँ छोटी गौरैया दिखाई दी । छोटी गौरैया ने उसे ढाढ़स बंधाया । एक छछूंदर की मदद से उसे बाहर निकाला । 

गोरैया ने खरगोश को इस वन के कटु अनुभवों के बारे में बताया , तो खरगोश उससे अपने घर लौट चलने का आग्रह करने लगा । खरगोश ने उसे अपनी पीठ पर बिठा लिया । फिर दौड़ चला पर वह रास्ता भटक गया । छोटी गौरैया कोई मधुर गीत गा रही थी । तभी एक पक्षी उड़ता · हुआ आया । उसका गीत सुनकर पूछने जुड़ गया की तुम यह मथुर गीत किसको सूना रही हो उसी ईश्वर के लिए जिसने मुझे यह मीठी आवाज दी है । 

 गौरैया ने जवाब दिया । - " तुम्हें यह बात किसने बताई ? " 1 - " मेरी माँ ने । माँ कहती थी कि ईश्वर ने जो गुण हमें दिए हैं , हमें उनका सदुपयोग करना चाहिए । ईश्वर के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए । " वह पक्षी गौरैया की इन बातों से बहुत खुश हुआ , क्योंकि वह पहचान चुका था कि यह छोटी गौरैया उसी की छोटी बहन है । 

जब गौरैया को पता चला कि वह उसका बिछुड़ा भाई सौंगर है , तब वह खुशी से फूली न समाई । उसने सोंगर को बताया कि वे वन का रास्ता भटक गए हैं । इस पर सौगर उन्हें वन का रास्ता दिखाता , उड़ता रहा । जब वे वन के काफी निकट आ पहुँचे , तो सोंगर उन्हें अलविदा कहकर , किसी दूसरे वन की तरफ उड़ चला । उधर वन के चूहे और अन्य साथियों को एक दिन , कूड़े के ढेर में कंप्यूटर का एक खिलौना हाथ लगा । 

बस , फिर क्या था , होशियार चूहे की मदद से कंप्यूटर में बैटरी फिट करवाई गई । वन महोत्सव का दिन भी निकट आ पहुँचा था । वन - महोत्सव के अवसर पर हर साल वन के सभी साथी दावत में शामिल होते थे । इस अवसर पर पिछले वर्ष की घटनाओं का ब्यौरा सभी सदस्यों के सामने रखा जाता था । विशेष अवसरों पर वन के साथियों द्वारा प्रदर्शित साहस और शौर्य के लिए , उन्हें पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जाता था । 

वन से सभी साथी इस उत्सव में भाग लेते थे । इस वर्ष तो इस मौके पर विशेष उत्साह था , क्योंकि कंप्यूटर नामक यह विचित्र यंत्र उनके हाथ आ लगा था । सभी ने अपने मन में कंप्यूटर से पूछने के लिए कई प्रश्न तैयार कर रखे थे । चूहा कूद - कूदकर , कंप्यूटर चालू करने की कोशिश में मगन था । 

इसी बीच छोटी गौरैया और खरगोश भी वहाँ आ पहुँचे । उनके आने से सभी साथियों में खुशी की लहर दौड़ गई । वे सब उनका हाल चाल पूछने लगे । खोई गौरैया और बिछुड़े खरगोश से फिर मिलकर समूचा जंगल झूम उठा । खरगोश ने साथियों को बताया कि किस प्रकार साही की जान बचाने के लिए उसने जंगली कुत्ते को भरमाया । उसे भटकाते भटकाते वह खुद भी किसी दूसरे वन में जा पहुँचा । 

वन के सभी जीव - जंतु खरगोश की बुद्धिमत्ता और बहादुरी की तारीफ करने लगे । इस वर्ष की बहादुरी का सम्मान भी उसी को दिए । जाने की घोषणा कर दी गई । आखिर खरगोश ने अपनी जान की परवाह न करते हुए , साही की जान जो बचाई थी ।

 खरगोश अपने साथियों से मिले इस प्यार और सम्मान से फूला नहीं समा रहा था । किन्तु उसने इस पुरस्कार को लेने से मना किया । कहा कि साही की जान बचाने के लिए तो सभी साथियों ने अपनी - अपनी तरह से भरपूर कोशिश की थी । 

लेकिन वन के साथियों ने उसकी एक न मानी । फिर कंप्यूटर से प्रश्न पूछने का शुभारम्भ भी खरगोश से ही कराया गया । खरगोश ने कंप्यूटर से प्रश्न किया- " यहाँ के जीव - जंतुओं में ऐसी क्या विशेष बात है जो दूसरे वन के जीव - जंतुओं में नहीं है ? " इस पर कंप्यूटर ने उत्तर दिया- " प्रेम । " फिर गौरैया ने प्रश्न किया- " हम अन्य वनों के जीव - जंतुओं की किस प्रकार सहायता कर सकते हैं ? 

कंप्यूटर ने फिर जवाब दिया- " प्रेम । " और भी कई प्रश्न पूछे गए । कंप्यूटर ने हर प्रश्न का एक ही उत्तर दिया- " प्रेम । " इस पर सभी साथी खीज गये , किन्तु श्रीमती रकून इस एक शब्द में छिपे गहरे अर्थ को समझ गई । उन्होंने वन के सभी साथियों को बताया कि प्रेम से दुनिया की हर समस्या का हल किया जा सकता है । उन्होंने कहा कि हमें ईश्वर का यह संदेश दुनिया के कोने - कोने में पहुँचाना है । फिर वन के सभी साथियों ने मिलकर एक समूह - गीत गाया । इसका अर्थ था- ' प्रेम ने जीता जग सारा । ' चांदनी रात में गीत के मधुर स्वर चारों दिशाओं में गूंज रहे थे ।

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