चेमतेई निकुआला की कहानी | Daughter Chemtei Ki Kahani

 


मिजोरम में एक कबीला था । उसका मुखिया बहुत चतुर था । सब उसे राजा निकुआला कहते थे । उसका न्याय मशहूर था । दूर - दूर से लोग उससे सलाह माँगने आया करते थे । उसे पहेली पूछने का बहुत शौक था एक बार दो भाई राजा के पास अपने झगड़े का फैसला करवाने आए । 

पिता मरते समय दोनों के लिए एक गाय छोड़ गए थे । उन्होंने बेटों से यह भी कहा था कि बाद में पशु - धन को वे आपस में बाँट लें । अब इसी पर झगड़ा था कि कौन कितना ले । निकुआला कुछ देर सोचता रहा , फिर बोला- " मैं तुमसे कुछ प्रश्न पूछूंगा , जो भी सही उत्तर देगा , सारा पशु - धन उसी को मिल जाएगा ।

निकुआला की बात सुनकर बड़ा भाई सोच में पड़ गया । उसे मालूम था कि छोटा चतुर है । अगर मैं उत्तर न दे पाया तो सारा पशु धन मुझसे छिन जायेगा । यह कैसा न्याय है ! सोचकर उसने कहा " राजा , हम बंटवारा करने आए हैं , पहेलियाँ बूझने नहीं । " छोटा भाई बोला- " आप जो चाहें पूछिए । 

निकुआला ने पूछा- " संसार में सबसे तेज गति किसकी है ? उसके बड़े भाई के पास में बहुत तेज दौड़ने वाला घोड़ा हुआ करता था । वह एक पल में सबको अपने पीछे छोड़ दिया करता था । उसने बताया की हम अगले सुबह उत्तर दे दूँगा ।  उसके छोटे भाई की बेटी चेमतेई काफी बुद्धिमान थी । 

पिता ने उसे निकुआला का प्रश्न बताया , तो उसने उत्तर बता दिया । वह निश्चित होकर सो गया । उसके अगले दिन दोनों भाई दुबारा निकुआला के पास पहुंचे । बड़े भाई ने बताया की- " पुरे दुनिया में सबसे तेज गति हमारे घोड़े की है तब जाकर छोटा बोल पड़ा " सबसे अधिक तेज चाल से मन चला करता  है । वह एक पल भर में पूरे संसार का भर्मण कर सकता है ।

निकुआला ने छोटे भाई से कहा- " तुम्हारा उत्तर ठीक है , लेकिन सच - में कहना , तुमको ये किसने बताया है ? " - " मेरी बेटी चेमतेई ने । ” यह सुनकर बड़े भाई ने सिर झुका लिया । वह समझ चुका था कि अब पशु - धन छोटे भाई को मिल जाएगा । तभी निकुआला ने उससे कहा- " यह ठीक है कि तुम मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दे सके , फिर भी तुम्हारा नुकसान नहीं होगा ।

 इसके बाद फिर उसने एक नया प्रश्न कर दिया बताओ संसार में सबसे अनमोल क्या होती है बड़ा भाई इस पर भी कोई उत्तर न दे सका और छोटे ने चेपतेई बिटिया से पूछकर बताने की बात कही । अगली सुबह छोटा भाई निकुआला के पास आकर बताया की इस दुनिया की सबसे अनमोल माने जाने वाले चीज नींद मानी जाती है जोकि सोते वक्त दुनियाँ के हर एक प्राणी बिलकुल एक जैसे हो जाते हैं । छोटे - बड़े में कोई भेद भाव नहीं रहता है । इस चीज की तुलना किसी से नहीं की जा सकती । वाह ! क्या उत्तर दिया है । -निकुआला ने खुश होकर कहा । वह चेमतेई से बहुत प्रभवित हुआ । उसने एक खाली बोरी चेमतेई के पिता को देते हुए कहा- " इसमें हवा के बीज हैं । चेमतेई से कहना , इसकी फसल उगाकर मुझसे बात करे । 

 चेमतेई खाली बोरी देखकर मुसकराने लगी । उसने कहलवाया " मैंने हवा के बीज हवा को सौंप दिए हैं । जब फसल तैयार हो जाएगी , तो हवा स्वयं आपका दरवाजा खटखटाएगी । प्रतीक्षा करें । ' बड़ा भाई निकुआला के इस खेल से परेशान था । उसने कहा " राजा , हम आपके पास बंटवारे के लिए आए थे , वह बात तो शायद आप भूल ही गए । क्या यही आपका न्याय है ? " निकुआला ने कहा- " सारे पशु तुम्हारे हुए । " " यह कैसा न्याय है आपका ' -छोटे भाई ने निराश स्वर में कहा । ' आपके प्रश्न का उत्तर देने के लिए मैं स्वयं आपके घर आ रहा हूँ । मुझे चेमतेई से ऐसा उपहार चाहिए जो उसके हाथ से मेरे हाथ में न आ सके । 

 निकुआला ने छोटे भाई से कहा । बड़ा भाई प्रसन्न मन से घर चला गया। उसे सब कुछ मिल गया , और वह भी तब जब वह एक भी प्रश्न का उत्तर नहीं दे सका था । छोटा भाई निराश था , क्योंकि उसने चेमतेई से पूछकर निकुआला के प्रश्नों के सही उत्तर दिये थे , फिर भी राजा ने सही बंटवारा नहीं किया ।

शाम को निकुआला अकेला चेमतेई के घर पहुँचा । वहाँ चेमतेई , उसका पिता तथा दूसरे संबंधी उसका स्वागत करने के लिए उपस्थित थे । निकुआला को देखकर चेमतेई कपड़े से ढका एक टोकरा लिए उसकी ओर बढ़ी । फिर बोली- “ मेरा उपहार स्वीकार कीजिए ।

यह कहकर उसने टोकरे के ऊपर ढका कपड़ा हटा दिया । उसमें एक कबूतर था , जो कपड़ा हटाते ही उड़ गया । - निकुआला के मुँह से निकला- " वाह ! " निकुआला का खूब स्वागत हुआ । उसने कहा- " मैं चेमतेई से विवाह करना चाहता हूँ । ' यह सुनकर चेमतेई का पिता प्रसन्न हो उठा । उसने बताया मैं समझ गया की आपने हमारे बड़े भाई को सारा पशु धन देकर हमारे साथ घोर अन्याय किया है परन्तु आपसे सम्बंध जोड़ने के बाद से मुझे वह सब कुछ मिल गया जो कि किसी और को नहीं मिल पाया है ।

निकुआला ने कहा- " विवाह के लिए मेरी एक ही शर्त है - चेमतेई मेरे राजकाज में हस्तक्षेप न करे । जिस दिन से ऐसा होगा उसी दिन इसे हमारे घर को छोड़ना पड़ेगा । यह अपने साथ केवल एक चीज ले सकती है । चेमतेई ने बताया  मुझे आपकी सभी शर्त मंजूर है । दोनों का विवाह धूमधाम से हुआ । निकुआला और चेमतेई सुखपूर्वक रहने लगे । चेमतेई बुद्धिमती थी । कई बार वह देखती कि निकुआला ने न्याय नहीं किया , पर वह कुछ कह न पाती , क्योंकि उसे निकुआला की शर्त याद थी । 

एक बार निकुआला ने एक मंत्री को मृत्युदंड दिया । चेमतेई जानती थी कि मंत्री निर्दोष है , बिना बात मारा जाएगा । मंत्री की पत्नी चेमतेई से मिली । उससे कहा- " मेरे पति के प्राण बचा लो । ” चेमतेई ने निकुआला से कहा- “ मंत्री निर्दोष है । किसी ने आपको गलत खबर दी है । आप फिर से जाँच करें तो सत्य का पता चल जाएगा । निकुआला ने जाँच की तो उसे पता चला , सचमुच उसने मंत्री को बिना सोचे - समझे प्राणदंड दे दिया था । उसने सजा रद्द कर दी । पर चेमतेई से कहा- " तुमने शर्त तोड़ी है , इसलिए मेरे घर से चली जाओ । " चेमतेई ने कहा- " मैं खुशी - खुशी चली जाऊँगी क्योंकि एक निर्दोष के प्राण बच गये हैं । आप आज शाम का भोजन मेरे साथ कीजिए । मैं कल सुबह आपको यहाँ नहीं दिखाई दूँगी । 

निकुआला का मन उदास हो गया । वह सोच रहा था- " -मुझे ऐसी शर्त नहीं लगानी चाहिए थी । ' चेमतेई प्रसन्नता से भोजन बना रही थी । उस रात दोनों देर तक बातें करते रहे । फिर निकुआला को नींद आ गई । सुबह निकुआला की नींद टूटी तो उसने देखा चेमतेई वहाँ मौजूद है । उसने कहा- " तुम अभी तक यहीं हो ! क्या तुम्हें शर्त याद नहीं है ? " “ याद है , एकदम याद है 

चेमतेई ने हँसकर कहा- " पहले यह तो देखिए , आप कहाँ हैं ? " निकुआला हड़बड़ाकर बाहर निकला , तो उसने देखा कि वह अपनी ससुराल में है । " यह कैसे हुआ ? " - उसने पूछा । " आपने शर्त में कहा था कि नियम तोड़ने पर मुझे आपका घर छोड़ना पड़ेगा - मैं केवल एक चीज लेकर आ सकूँगी । बस , रात के समय आपके भोजन में मैंने एक पौधे का रस मिला दिया । उसके प्रभाव से आप गहरी नींद में सो गए । फिर मैं आपको पालकी में यहाँ ले आई । 

सुनकर निकुआला खूब हँसा । बोला- " मैं भी शर्त बाँधकर पछता रहा था । अच्छा , आज के बाद में न पहेली पूछूंगा , न कोई शर्त लगाऊँगा । जाओ , घर चलें । और हाँ , मैं तुम्हारी सलाह से फैसले किया करूंगा । " " यह आपकी नई शर्त है क्या ? " - चेमतेई ने हँसकर पूछा । निकुआला भी हँस रहा था ।




और नया पुराने