भेड़िहार की कहानी | Har Cheej Kaam Aatee Hai


गड़ेरिये के पास बहुत सी भेड़ें थीं । उनकी रखवाली के लिए उसने कुछ कुत्ते भी रख छोड़े थे । उन भेड़ों को दिन भर जंगल में चराता रहता था । शाम होते - होते उनको लेकर घर लौट पड़ता था और मड़ई में उनको बन्द कर देता था । फिर उनकी जरा भी खबर न लेता , परन्तु उन कुत्तों के आराम का पूरा - पूरा ख्याल रखता था । 

उनको बड़ी सावधानी से खिलाता पिलाता और भूलकर भी कुत्तों को भूखा ना रहने देता था । यह सुनकर भेड़ों को बड़ा दुःख हुआ करता था । एक दिन उन्होंने गड़ेरिये से जाकर बोला की समस्या है सरकार ! हम हर तरह से निहचिंत होकर आपके काम आते हैं । फिर भी आप हमारी कोई खबर नहीं लेते ? 

परन्तु कुत्ते आपके किसी काम नहीं आते । फिर भी आप उसको खूब खिलाते - पिलाते हो और हर तरह के आराम पहुंचाते हैं । देखिए , आप सदा हमारी बाल काटकर ऊन बनाते हैं जिससे उसके कम्बल बनाये जाते है और उन्हें बेच - बेचकर आप रुपये कमाते हैं । इसके सिवाय , आप हमारा दूध भी पीते हैं और पिलाते हैं ? फिर आप इतनी रखवाली से कुत्तों का करते हो और क्यों उनकी रखवाली करते हैं ? 

यह सुनकर गड़ेरिया तो कुछ न बोला , परन्तु एक कुत्ता चुप ना  रह सका । उसने चट से उत्तर दिया- पागल हो ! तुम सबको भगवान ने बुद्धि नाम की कोई चीज तो दी है । जरा सोचो यदि हमलोग तुम्हारी रखवाली न करें तो तुमलोगों की रखवाली कौन करे ? फिर भेड़िये सब तुम्हें मारकर खा जाये या नहीं ? कही अब हम सभी कुत्ते मालिक के काम आते हैं ?

इसलिए तो मालिक हमारे सुख - दुःख का इतना ख्याल रखते हैं । भेड़ों ने कहा- ठीक है ! मान लिया हमने , तुम मालिक के नहीं हमारे ही काम आते हो । अच्छा हमारी समझ में आ गया कि संसार में कोई ऐसी चीज नहीं जो बेकार हो । वह किसी न किसी काम में अवश्य आती है ।

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