सांढ़ की चतुराई शिक्षादायक कहानी | Inspirational story of bull

lion bull story


सिंह की नजर सांढ़ पर पड़ी । उसके मुंह में पानी भर आया । वह सोचने लगा । जैसे बने इस सांढ़ को मारकर खाना चाहिए । परन्तु यह खूब तगड़ा , खूब मजबूत है । इसे मारना सरल नहीं है मैंने इस पर हमला किया और कहीं यह मुझसे भिड़ गया मुझ पर कहीं अपने लम्बे - लम्बे सींग चला बैठा तो शायद मुझे ही लेने के देने पड़ जायेंगे . 

फिर करना क्या चाहिए ? आखिर सिंह को एक उपाय सूझा । वह सांढ़ के पास पहुंचा और मुस्कुराकर बोला - सांढ़ भाई ! आज मैंने जंगल के पशुओं को निमंत्रण दिया है । आप भी पधारने की कृपा कीजिए । यही कोई दो घण्टे बाद । मैंने तरह - तरह के भोजन तैयार करवाये हैं । उनमें कुछ व्यंजन ऐसे भी हैं जो आपने कभी नहीं खाये होंगे । 

इसलिए आप दावत में अवश्य पधारिये , देखिये - भूलिए नहीं । सांढ़ ठीक समय पर सिंह के यहाँ पहुंचा , तो देखता क्या है कि सामने कोई थाल मौजूद है । जिसमें से कुछ खाली है और कुछ दूब , घास , दाने आदि पदार्थों से भरे हैं । 

सांढ़ पर नजर पड़ते ही सिंह बहुत प्रसन्न हुआ और मुस्कुराते - मुस्कुराते बोला - आइए विराजिए भोजन तैयार है आप खाना शुरू कर दीजिए । मैं अभी इन खाली - थालों में नए - नए पदार्थ परोसता हूँ और लोगों की चिन्ता छोड़िए । फिर आते रहेंगे , यहां आप खड़े - खड़े क्या करते हैं । आप बैठिए वे सिंह सोच रहा था कि सांद भोजन करने के लिए झुके , त्योंहि मैं उसकी गर्दन तोड़ डालूं । 

परन्तु सांढ़ भोजन के साथ देखते हुए उल्टे पैरों खड़ा , सिंह घबड़ाकर बोला - हें - हें , यह आप क्या करते हैं । मैंने आपके लिए ही इतनी तैयारी की है और आप इस तरह भागे जा रहे हैं । कृपा कर बैठिए तो । मैं अभी घड़ी भर में इन खाली थालों में नए - नए पदार्थ परोस देता हूँ । - सांढ़ ने चलते - चलते उत्तर दिया - क्षमा कीजिए । मैं समझ गया कि आपने यह तैयारी किस मतलब से की है यह भी समझ गया कि आप इन खाली थालों में कौन से नए पदार्थ परोसने वाले हैं । 

मेरे शरीर के टुकड़े-टुकड़े करके आप खाने की तैयारी में लगे हैं । है  यही बात ? फिर तो यहाँ से भागने में ही मेरी भलाई है । छली का छल तोड़ सकूं अभी इतनी चतुराई मुझमें है ।


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