मनोज स्टेशन पर टिकट खरीदने के लिए एक लम्बी लाइन में खड़ा हुआ था । एक - एक करके आदमी आगे बढ़ते जा रहे थे , मनोज भी धीरे - धीरे आगे बढ़ रहा था । वह बड़े धीरज से अपनी बारी का इंतजार कर रहा था । वह बेचैनी से इधर - उधर देखता और फिर चुपचाप अपनी जगह खड़ा हो जाता मनोज के समाने वाली आदमी कुछ देर तो लाइन में आगे खिसकता रहा । और फिर धीमे से लाइन से आहर निकल गया ।
मनोज ने उसको देखा और फिर जल्दी से आगे बढ़ गया । उसने देखा कि उससे आगे केवल तीन - चार ही लोग रह गए हैं और उनके बाद उसका नम्बर आ जाएगा । कुछ देर बाद उसके सामने वाले पुरूष ने एक टिकट बम्बई के लिए खरीदी और पैसे देने के लिए जेब में हाथ डाला , पर यह क्या एकदम उसका चेहरा उतर गया वह परेशान - सा इधर - उधर अपनी जेबों में हाथ मारने लगा । टिकट बाबू ने उसकी Tarph देखा उसका मुंह उतरा देखकर पूछने लगा , क्या हो गया जेब कट गई ?
उस पुरूश ने कहा- हां टिकट बाबू । टिकट बाबू ने फौरन पुलिस को फोन किया और कुछ देर के बाद ही दो सिपाही वहां पहुंच गए । उन्होंने उस आदमी से पूछा लाइन में आपके पीछे कौन खड़ा था । उस पुरुष मनोज की ओर देखा । ने पलटकर सिपाही मनोज का हाथ पकड़ लिया और बोला- लाइन में से कोई नहीं हटेगा । और फिर उन सिपाहियों ने धीरे - धीरे सबकी तलाशी लेनी शुरू कर दी । लेकिन किसी की भी जेब में बटुआ नहीं मिला ।
अंत में सिपाही ने मनोज को कहा- इस सज्जन का पर्स कहां है ? मनोज ने बड़े भोलेपन से कहा- मुझे पर्स के विषय में मालूम नहीं , मैं कुछ भी नहीं जानता । कुछ सिपाहीओं ने मुस्कराकर कहा- तुम ऐसे नहीं बताओगे , चलो हमारे साथ थाने चलो । यह सुनकर मनोज का मुंह शर्म के कारण लाल हो गया और मुंह पर पसीना छलकने लगा ।
वह सोचने लगा इससे बेहतर तो वह मर जाए तो अच्छा है । उसके साथी सुनेंगे तो क्या सोचेंगे , एक का प्रेमी उसका विश्वासी चोरी के अपराध में पकड़ा गया है । अजय , जिसे कल ही मैं प्रभु यीशु और उसके प्रेम के विषय में बता रहा था , मेरे ऊपर हंसेगा । यह विचार आते ही उसका सिर घूम गया , उसे ऐसा लगा मानो वह अभी बेहोश होकर गिर जाएगा ।
बड़े दुःखी स्वर में उसने कहा- हे प्रभु तू जानता है , मैं निर्दोष हूँ । यह सुनकर सिपाही हंसे- बस - बस यह मक्कारी बंद करो , तुम जैसे लोग ही तो समाज और परमेश्वर के लिए कलंक हैं कलंक का नाम सुनकर । मनोज को बड़ा दुःख हुआ । उसने बड़ी ऊंची आवाज में पुकारकर कहा- प्रभु अगर तूने मेरे यह न होने दिया तो वास्तव में तेरे नाम पर कलंक लग जाएगा । तू जानता है , मैं तेरा विश्वासी हूँ तुझसे प्रेम करता हूँ , मैं तेरा नाम नीचा नहीं होने दूंगा ।
मनोज की इस प्रार्थना को सुनकर सिपाही बड़ा प्रभावित हुआ , चुपचाप अपनी जगह खड़ा अपने मन में सोचता रहा- एक अपराधी की ऐसी प्रार्थना नहीं हो सकती । सब लोग खामोश थे । फिर लोगों ने कहा क्यों हम सबका समय बर्बाद कर रहे हो , इसे थाने ले जाओ । सिपाही उसे थाने की ओर ले जाने लगा कि अचानक ही मनोज की नजर एक आदमी पर पड़ी जो खामोशी से सबसे दूर एक रेस्टारेंट के पास खड़ा चाय पी रहा था ।
मनोज को एकदम ध्यान आया कि यह आदमी भी लाइन में था , ठीक मनोज के सामने और फिर कुछ देर के बाद लाइन से निकलकर चल गया था । मनोज ने सिपाही से कहा- देखा वह आदमी जो सामने खड़ा है उसकी तलाशी लो । सिपाही ने टालते हुए पूछा , क्यों ? कोई आवश्यकता नहीं वह लाइन में नहीं था ।
किन्तु जब मनोज ने उसे बताया कि वह भी लाइन में उसके सामने खड़ा था और कुछ समय बाद लाइन से निकल चला गया था तो सिपाही ने उसकी बात पर ध्यान दिया और तब जाकर उस आदमी के पास गया । सिपाही को अपनी ओर आता देख वह आदमी घबड़ा गया और उसके हाथ से प्याला गिरकर टूट गया ।
सिपाही उस आदमी को बुलाकर मनोज के पास लाया और पूछा , यही था ? मनोज ने सिर हिला दिया , सिपाही ने उस आदमी से पूछा- क्या तुम लाइन में खड़े थे , वह आदमी हकलाते हुए बोलना चाहा तबतक मनोज बोल पड़ता है - तुम कुछ देर पहले लाइन में मेरे सामने खड़े थे और फिर बिना टिकट लिए लाइन से बाहर आये थे ।
वह आदमी बड़े जोर से मनोज पर चिल्ला उठा - झूठा कहीं का । किन्तु पुलिस के सिपाही ने कहा- अभी पता चल जाता है कि कौन पूठा है । उसने उसकी तलाशी ली और कुछ देर बाद ही उसकी अंदर वाली जेब से एक पर्स निकल आया । वह आदमी जिसका पर्स निकला था जोर से चिल्ला उठा- यही है , यही है- मेरा पर्स । उसने अपने पैसे गिने पूरे थे । सिपाही ने उसे गिरफ्तार कर लिया और मनोज को छोड़ दिया और बोला- क्षमा करना , हमने गलती से आपको पकड़ लिया था ।
मनोज ने मुस्कुरा कर कहा- कोई बात नहीं , सच्चाई तो खुल ही गई । परमेश्वर अपने निर्दोष विश्वासियों को कभी अकेला नहीं छोड़ता और उनकी प्रार्थना को सुनकर उत्तर देता है । दोनों सिपाही उस आदमी को पकड़कर ले गए लेकिन वह कुछ ही दर पहुंचें होंगे कि एक सिपाही वापस मनोज के पास आया और बोला- मैंने तुम्हारे प्रभु में कुछ अजीब विशेषता पायी है ।
जब तुम उससे प्रार्थना कर रहे थे तो मुझे लगा कि तुम अपने किसी साथी से बात कर रहे हो और उसने कितनी जल्दी तुम्हारी प्रार्थना सुनकर उसका उत्तर दे दिया । मैं भी उसका ऐसे ही ग्रहण करना चाहता हूँ जैसे तुमने उसे अपनाया है । आशा है तुम मेरी मदद करोंगे । लो यह मेरे घर का पता ! तुम अवश्य ही मेरे घर आना । मनोज ने उसका पता ले लिया । सिपाही वहां से चला गया , उसके जाने के बाद मनोज सोचता रहा फिर वहां से चला गया
उसके जाने के बाद मनोज सोचता रहा फिर मुस्कराकर बोला । अब मैं समझा कि यह सब मेरे साथ क्यों हुआ । प्रभु ! इसलिए कि मैं इस सिपाही को तेरे लिए जीत सकूं । मनोज स्टेशन से वापस अपने घर लौट आया और उसी शाम वह सिपाही के घर पहुंचा । उसने प्रभु के प्रेम के विषय में बताया और उसके साथ प्रार्थना की और उस सिपाही ने उसी रात प्रभु यीशु को अपना लिया । जितने यहोवा ( परमेश्वर ) को पुकारते हैं
अर्थात् जितने उसको सच्चाई से पुकारते हैं उन सबों के निकट रहता है । वह अपने घरवैयों की इच्छा करता है , उनकी दुहाई सुनकर उनका उद्धार करता है । या यों जानिये कि जब ऊपर वाले की कृपा होती है तब सच्चे का जीत होता है और झूठे का मुंह । काला , सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से खुशबू आ नहीं सकती कभी कागज के फूलों से ॥