अरुण की आपबीती और प्रभु यीशु का चमत्कार | Bhataka Raahee Bana Sipaahee

Prabhu Jesus Ke Ek Aur Katha


अपने बचपन के बीते हुए दिनों की याद में खोया हुआ अरुण सिर झुकाए सड़क के किनारे चला जा रहा था- किस नाज किस प्यार से मेरी मां ने मेरा पालन - पोषण किया । पिताजी के मरने के बाद मां ने कहां - कहां की ठोकरें न खाई । कितनी मेहनत करके उसने मुझे पढ़ाया लिखाया । अच्छे से अच्छा पहनाया और खिलाया मुझे याद है मेरी फीस के लिए पास पड़ोस के कपड़े रात भर बैठकर सिला करती थी । उसकी आंखें कितनी कमजोर हो गई थी। 

मैं कैसे उसे गले में लिपट जाया करता था । मां जब मैं बड़ा हो जाऊंगा और कहीं का अफसर बन जाऊंगा तो मैं यह सब कुछ तुम्हें नहीं करने दूंगा । मां किस प्यार से मेरी ओर देखती । प्यार की हल्की - सी , थपकी मेरे गाल पर लगाती और कहती , मेरी आंखें तो उसी दिन का इंतजार कर रही है जब मैं अपने प्यारे बेटे को कहीं का बहुत बड़ा अफसर बनते देखूंगी । 

मेरे बेटे तेरे पिताजी की यही इच्छाधी कि वह तुझे बहुत अच्छी शिक्षा दें और किसी ऊंचे पद पद देखें । वह तो अपनी इच्छा को पूरी नहीं कर सके । परन्तु मैं यह चाहती हूँ कि उनके मरने के बाद उनकी इस इच्छा को पूरी कर सकूं । 

एक दिन मां की यह मनोकामना पूरी हो गई । वह पढ़ - लिखकर एक बड़ा अफसर बना , चंद ही सालों में धन मेरे कदम चूमने लगा । धन होने के साथ - साथ उसके मित्रों का घेरा भी बढ़ने लगा । अपने मित्रों के साथ वह अपने पैसे का दुरूपयोग करने लगा । धन कहां तक उसका साथ देता , धीरे - धीरे पैसे खत्म होने लगे । मेरी इज्जत लोगों के बीच कम होने लगी और मेरे साथी जो घंटों मेरे साथ बैठा करते थे 

एक - एक कर उसे छोड़ने लगे और आज उसका यह हाल हो गया कि वह रोटी के एक टुकड़े के लिए मोहताज हो गया है । उसको सर छिपाने के लिए कहीं जगह नहीं है । काश ! वह  अपनी मां के शिक्षाओं को मान लेता , उन्हीं पर चलता तो आज  इस हालत में नहीं पहुंचता । वह अपने धन और दौलत के नशे में हर चीज को तुच्छ जाना यहां तक कि प्रभु परमेश्वर के प्रेम को भी ठुकरा दिया । 

अरुण के आंखों में आंसू आ गया , आंसू की बूंदे टिप - टिप गिरी और सूखी धरती में समा गई । वह परेशान था , अपने जीवन से बहुत निराश हो चुका था । वह अपने मन में सोच रहा था ऐसे जीवन से क्या फायदा , इससे तो मर जाना ही अच्छा है 

उसने अपना मुंह ऊपर की ओर उठाया उसे लगा दूर तक सुनसान ही सुनसान था और अंदर मानो खोखलापन था । अरुण चलते - चलते रूक गया और सोचने लगा , मैं क्या करूं कहां जाऊं ? धीरे - धीरे उसके कदम नदी की ओर उठने लगा जो कुछ ही दूरी पर बह रही थी । 

इन्हीं विचारों से वह डूबा नदी के किनारे घूमता अचानक रुक गया , पानी की बहती हुई तेज धारा को घूरने लगा और उसके मन में यह विचार उठा अरुण ठीक है , इन्हीं बहती तेज धाराओं में तू क्यों नहीं समा जाता , तेरी सारी चिन्ताएँ सारी परेशानी दूर हो जायेगी । इस विचार के आते ही अरुण ने यह फैसला कर लिया कि वह इन तेज लहरों में डूब जायेगा । 

यह फैसला करके वह नदी के बिल्कुल करीब , किनारे पर जा बैठा और अपने मन में सोचने लगा , जैसे ही थोड़ा अंधेरा होगा और लोगों की भीड़ कम हो जायेगी तो मैं अपने - आपको नदी के लहरों की सुपुर्द कर दूंगा । वह खामोश गुमसुम उस घड़ी का इंतजार करने लगा जब वह हमेशा - हमेशा के लिए इस नदी की लहरों में खो जायेगा । 

सूर्य धीरे - धीरे अपना मुंह ऊंचे - ऊंचें वृक्षों के पीछे छिपाने लगा । चिड़ियां वापस पेड़ों पर अपना बसेरा लेने लगी । हल्की - हल्की हवा चल रही थी । उसने आकाश की ओर नजर उठाया , तन्हाई खामोशी उसके ऊपर साया किए हुआ था । वह अभी अपने - आपको तैयार कर ही रहा था कि अनायास ही कुछ दूर पर एक घर में धीमी - रोशनी देखी , उसने रोशनी को बड़े गौर से घूरता रहा और अनजाने में उसके कदम उस घर की ओर उठने लगा । मानो कोई शक्ति उसे अपनी ओर खींच रही हो । 

वह दो - चार कदम ही आगे बढ़ा था कि उसने बड़ी सुरीली और दर्द भरी आवाज में किसी को गाते सुना । बड़े ध्यान से वह उस गीत को सुनने लगा । उस गीत का एक - एक शब्द उसके दिल की गहराईयों में उतर रहा था और वह उस ओर खींचता जा रहा था । 

चंद ही मिनट बाद वह उस दरवाजे पर जा पहुंचा जहां से उसे गाने की आवाज सुनाई पड़ रही थी । वह कुछ देर दरवाजे पर खड़ा । रहा फिर उसने बड़े धीमे से दरवाजा खटखटाया ; एक युवक ने दरवाजा खोला । अरुण सिर झुकाये दरवाजे के सामने खड़ा था युवक उसकी बिखरी हालत देखकर चौंक गया और बोला- तुम कौन हो और क्या चाहते हो ? अरुण ने बड़ी नम्रता से कहा- महाशय क्या मैं अंदर आ सकता हूँ ? 

यह सुनकर युवक चोंक गया और बोला , क्यों हम तुम्हें नहीं जानते तुम कौन हो , कहां से आये हो ? तुम हमें बताओ क्या चाहते हो ! अरूण ने कहा- मुझे आपके यहां से एक बहुत ही सुन्दर गीत सुनाई दिया है । और तभी दरवाजे पर खड़ा था तो मैंने महसूस किया कि आप लोग प्रार्थना में लगे हुए हैं । क्या मैं आपकी प्रार्थना में शामिल हो सकता हूँ । 

वह युवक कुछ देर तक खामोश रहा फिर बोला , ठीक है आप मेरी प्रार्थना में भाग ले सकते हैं । अरुण खामोशी से अंदर जाकर बैठ गया था उसने बाइबिल खोली और सबका ध्यान आकर्षित कर बोला , यह इस प्रकार लिखा है ... कि पौलूस ने बड़ी ऊंची आवाज में पुकारकर कहा- अपने - आपको हानि मत पहुंचाना क्योंकि मैं तेरे साथ हू ... ! अरुण इस पद को सुनकर चौंक गया । 

जैसे ही प्रार्थना समाप्त हुई उसने बड़े धीरे से कहा , भाई मैंने तो आपको अपने विषय में कुछ नहीं बताया था फिर आपको मेरे विषय में सारी बातें कैसे मालूम हुई । अभी जो कुछ आपने बताया वह सब मेरे ही ऊपर था । अरुण की बातों को सुनकर वहा बैठे सभी लोगों को आश्चर्य हुआ क्योंकि अरुण को उसने पहले कभी नहीं देखा था और न ही अरुण ने अपने विषय में उसे बताया था कि वह अपने जीवन से निराश होकर किस प्रकार नदी में कूदकर अपनी जान देना चाहता था । 

अरुण ने उन्हें बताया कि किस प्रकार वह निराश की स्थिति में उस मधुर गीत से आकर्षित हुआ और इस मकान की ओर खींचा चला आया । अरुण की आंखों में बेतहाशा आंसू बह रहे थे , उसने इस बात को महसूस किया , प्रभु यीशु उसे किस प्रकार इस अवस्था में संभाला उसे मृत्यु के मुंह से निकाल लिया ।

अरुण ने उसी समय अपना जीवन प्रभु को दे दिया और उसने अब फैसला किया कि वह जब तक जीवित रहेगा प्रभु यीशु के प्रेम और सुसमाचार को लागों तक पहुंचाता रहेगा । ताकि उस जैसे बहुत से लोग जो अभी तक अंधकार में पड़े हैं प्रभु के नजदीक है और अनन्त जीवन प्राप्त करें । धोखा न खाना । बुरी संगति अच्छे चरित्र को बिगाड़ देती है । 

धर्म के लिए जाग उठो और पाप न करो , क्योंकि कितने ऐसे हैं जो परमेश्वर को नहीं जानते । परमेश्वर ने इस भटके हुए राही को देश का सिपाही बना दिया ।

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