सफेद परी ( भाग -2 ) पिकनिक पर आए लोगों ने जब देखा कि उनके दो साथी गुम हो गए हैं तो वह पूरे जंगल में ढूढ़ने के पश्चात् भी उनका कोई पता नहीं चला । स्कूल से आए पिकनिक प्रबंधकों को बच्चे गुम होने से बड़ी चिंता होने लगी थी ।
उन्हें पता था कि हर बच्चे की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके कंधो पर ही आती है । न जाने राजू और प्रीती कहाँ चले गए ? बच्चों के जीवन के खेल ही निराले होते हैं । राजा और बालक अपनी बुद्धि से ही चलते हैं । स्कूल वालों को क्या पता था कि प्रीती और राजू जंगली जानवरों को देखने गए थे और वहाँ पर काले देव का शिकार हो गए हैं ।
ऐसी तो कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि इस जंगल में कोई काला देव भी रहता है । अब क्या हो सकता था न तो यह किसी के बस की बात थी और न ही इसके लिए कोई कुछ कर सकता था । थक हारकर सब वापस चले गए । खुशी - खुशी आए थे और रोते हुए चले गए ।
बच्चों के माँ - बाप स्कूल में ही अपने - अपने बच्चों को लेने आए थे । सब बच्चे अपने - अपने माँ - बाप के साथ चले गए लेकिन प्रीती और राजू के माता - पिता ? अपने बच्चों को न पाकर बड़े निराश हुए । पिकनिक प्रबंधकों ने जब उन्हें यह बताया कि उनके बच्चे जंगल में ही गुम हो गए हैं
तो उनके दिल को बहुत धक्का लगा । दोनों की माताओं ने तो अपना सिर पीटना शुरू कर दिया । रो रोकर उनका बुरा हाल हो रहा था । माँ तो माँ ही होती है जो नौ मास तक अपनी संतान को कोख में रखकर उसे पल - पल पालती है । अपने रक्त से उसे सींचती है । नौ मास तक कोख में रखकर उसे जन्म देती है तो उसकी हर साँस में ममता का रस घुला होता है ।
उस ममता की शक्ति को कौन दबा सकता है ? ममता का गम फूट - फूटकर आँखों के द्वारा बाहर निकल रहा था । अब कोई करे भी तो क्या करे ? सबके सब बेबस और मजबूर थे । उनके पास आखिरी हथियार यही था कि पुलिस को सूचित कर दें ।
अंतत : उन्होंने यही किया और सीने पर पत्थर रखकर घर में बैठ गए । दूसरी ओर , काला देव उन दोनों बच्चों को लेकर अपने घर में पहुँचा जो धरती से बहुत नीचे था । उस घर में जाने के लिए एक प्राचीन मंदिर के नीचे से सुरंग निकाली गई थी ।
उस मंदिर में शिवजी महाराज की एक पुरानी कांस्य की मूर्ति लगी थी । मंदिर के चारों तरफ बड़े घने वृक्ष थे जिनके कारण नीचे प्रकाश की किरण भी नहीं जा सकती थी । जैसे ही उस घर में प्रवेश किया गया तो उन्होंने देखा कि चारों तरफ हड्डियाँ ही हड्डियाँ और कुछ मानव और जानवरों के पिंजरे पड़े हैं जिनकी बदबू दिमाग में चढ़ रही थी ।
राजू और प्रीती का तो दिल कच्चा होने लगा था । उन्हें ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी - अभी उल्टी हो जाएगी । चारों ओर सड़ांद फैली हुई थी । सामने ही एक कमरा था जिसके अंदर एक सुन्दर नारी बैठी थी । उसके शरीर पर लगे दो पंख इस बात के साक्षी थे कि वह कोई परी है ।
उसके चेहरे की उदासी बता रही थी कि वह बहुत दुःखी है । यह सफेद परी है इसे केवल प्रतीक्षा है तुम्हारी नर बली की । अब देखो मैं तुम दोनों की बली देकर इससे कैसे विवाह करता हूँ । कल सुबह शनिवार है । उसी दिन हमारे घर में बली दी जाती है ।
मैं आज अपने परिवार के दूसरे लोगों को लाने के लिए जा रहा हूँ । कल रात को हमारे घर में बहुत बड़ा समारोह होगा । इस दोनों का माँस सब लोग खाएँगे , बड़े आनन्द के साथ ...। " हा ... हा ... हा ....। " " हा ... हा ... हा .... " हमारी शादी होगी , वह भी सफेद परी के साथ । प्रीती राजू और सफेद परी तीनों को उसकी हँसी को देखकर क्रोध आ रहा था । मगर वे लोग क्या कर सकते थे ।
उस काले देव की शक्ति के सामने उनकी शक्ति थी ही क्या ? मजबूर और बेबस इन्सान खून के घूँट पीकर रह जाता है । वही हाल राजू और प्रीती का था । दोनों इस समय मजबूर थे । सफेद परी उनकी ओर निराश नज़रों से देख रही थी कि शायद उसे इनकी मृत्यु पर दया आ रही थी । थोड़ी देर के पश्चात् काल देव चला गया ।
अब उस कमरे में वे तीनों ही रह गए थे । कुछ देर तक तो कमरे में खामोशी छाई रही । जैसे ही कुछ क्षण और बीते तो सफेद परी ने उनकी ओर बड़े ध्यान से देखते हुए पूछा कि तुम्हार नाम क्या है बच्चों । “ राजू और प्रीती । " ' तुम इस खूनी के चंगुल में कैसे फँस गए ? "
हम स्कूल की ओर से पिकनिक मनाने आए यह हमारा दुर्भाग्य था कि हम अपने साथियों को छोड़कर जंगल के जानवरों को देखने चले आए । बस फिर क्या था । जंगली जानवर तो पूरी तरह न देख पाए परन्तु हमें यह काला देव मिल गया जिसे हम मौत का फरिश्ता ही कहेंगे । सफेद परी कुछ सोच में पड़ गई और कुछ क्षणों के पश्चात् बोली क्या तुम जानते हो कि यह खूनी देव तुम्हारी हत्या करने वाला है ।
हाँ अभी - अभी ही तो वह बोलकर गया है । फिर तुमने क्या सोचा है । क्या सोचें अब सोचने के लिए क्या बचा है । सामने तो मौत खड़ी है । काला देव कहाँ छोड़ेगा । हमारे पास कौन सी शक्ति है जिसके द्वारा हम उसे रोक सकते हैं ? शक्ति ... शक्ति ... शक्ति ... वह परी बार - बार यही कह रही थी शक्ति ... शक्ति ... और साथ ही उसके दोनों हाथ भी क्रोध के कारण हिल रहे थे ।
जैसे उनसे कुछ कह रही हो । लेकिन उसकी बात होठों से बाहर नहीं आ पा रही थी । आप बोलो परी रानी ! कुछ तो बोलो ! यदि आप हमारी जान बचा दें तो हमारे माँ - बाप आपका यह अहसान कभी नहीं भूलेंगे । यदि इस पापी ने हमारी हत्या कर दी तो वे दुःख के मारे मर जाएँगे ।
क्या तुम दोनों मिलकर ऊपर वाले शिव मंदिर में जा सकते हो ? ” " हाँ ! क्यों नहीं । " “ तो फिर मेरी बात को ध्यान से सुनो । " " बोलो । " यह काला देव मुझे भी इन्द्र के अखाड़े से उठा लाया है । इसने मुझे बंदी बनाकर रखा है । मैं इस स्थान से हिलकर कहीं नहीं जा सकती क्योंकि उसने मेरे पॉव में जंजीर डाल रखी हैं ।
यह कहते हुए वह परी रोने लगी । उसकी आँखों में आँसू देखकर राजू और प्रीती का दिल भी डूबने लगा था । बेचारी परी इस खूनी देव की कैद में फँसी हुई है । वे दोनों अपना जीवन खतरे में यह बात तो भूल ही गए थे कि वह काला देव उनकी हत्या करके अपनी देवी को खुश करेगा और फिर इस सफेद परी से विवाह कर लेगा ।
छीं ... छीं ... छीं ... यह कितनी बुरी बात है कि यह खूनी पापी काला - कलूटा देव इतनी सुन्दर परी से अपना विवाह रचाएगा । प्रीती हमें यह विवाह हर हाल में रोकना होगा ।" राजू ! क्या तुम कुछ पागल तो नहीं हो गए । क्यों ! इनमे पागल जैसे कौन सी बात है ? क्या कोई पागल ऐसी बात सोचेगा कि इस मजबूर औरत के साथ होने वाले अत्याचार को रोका जाए । प्रीती मैं यह बात अच्छी तरह से जानती हूँ कि यह सुन्दर सफेद परी उसके साथ विवाह होते ही मर जाएगी ।
वह तो पापी है , खूनी है । मानव खून पीने वाला गंदा देव है । उसके पास से तो इतनी सड़ी हुई गंध आती है कि यह परी उसे सूँघते ही मर जाएगी , और अपने बारे में क्या विचार है ? क्या तुम जानते हो कि इस दुनियाँ में हम केवल एक दिन के और मेहमान हैं । प्रीती ! जब हम मरने ही जा रहे हैं तो क्यों न मरने से पहले इस सुन्दर परी की जान बचा लें ।
स्वयं को मिटाकर दूसरों को बचाना ही तो मानव का धर्म है । मेरी माँ तो सदा यही कहती थीं कि- " कर भला सो हो भला । " ठीक है करो भला । हम दोनों तो सफेद परी से भी कहीं अधिक मजबूर हैं क्योंकि एक तो हम दोनों बच्चे हैं दूसरे हम इस समय काले देव की जेल में हैं ।
ऐसे में हम सफेद परी की क्या सहायता कर सकते हैं ? " प्रीती अब हम अकेले नहीं हैं । जरा सोचो 1 + 1 हम दोनों दो एक से बनें 11 और सफेद परी हमारे साथ आएगी तो 1 + 1 + 1 तीनों मिलकर कितने हुए 111 एक सौ ग्यारहा " हा ... हा ... हा ...। " प्रीती ज़ोर - ज़ोर से हँसती हुई कहने लगी राजू तुम्हारा भी जवाब नहीं । तुम तो वास्तव में ही बड़े तेज़ दिमाग के हो । दिमाग के साथ - साथ तुम बड़े बहादुर भी हो ।
सफेद परी इन दोनों की बातें बड़े मज़े से सुन रही थी । उसे राजू की बात बड़ी पसंद आई थी । वह सोच रही थी कि यदि बच्चा है तो क्या हुआ बुद्धि तो बड़े - बड़ों से भी कहीं अधिक तेज़ है । हो सकता है यही मुझे मुक्ति दिलाने में सफल हो जाए । बस फिर क्या था सफेद परी ने उन दोनों को अपने पास बुलाया और बड़े प्यार से उन्हें समझाते हुए कहा कि तुम जो कुछ भी सोच रहे हो मैं तुम्हारी हिम्मत की दाद देती हूँ ।
अब हम तीनों को ही अपनी जान बचानी है जबकि हमारा शत्रु बहुत शक्तिशाली है । उसके सामने तो हम कीड़े - मकोड़े हैं । वह जब चाहे हमें मसल सकता है लेकिन यदि हम बुद्धि से काम लें तो हम इस खूनी देव को जान से मार सकते हैं । वह कैसे ? परी आँटी हमें जल्दी से बताओ मैं तो उसे जान से ही मारना चाहता हूँ ।
देखो राजू इस मकान के अंदर एक प्राचीन गुफा है । उसका रास्ता वह सामने दीवार में से है । जिसके ऊपर काला परदा लगा है । उस परदे के बाहर खड़े होकर तीन बार बोलो - " जय काली । " " जय काली । " ' जय काली । " फिर द्वारा खुलेगा उसके अंदर जैसे ही तुम प्रवेश करोगे तो सामने ही एक पिंजरे में तोता बैठा नज़र आएगा ।
बस उसी तोते के अंदर इस खूनी देव का जीवन है । उस तोते को मार डालोगे तो यह उसी समय अपने आप मर जाएगा । जैसे ही यह मरेगा , हम स्वतंत्र हो जाएँगे । मैं तुम्हें अपने ऊपर बैठाकर उड़ती हुई तुम्हारे घर छोड़ आऊँगी और स्वयं देवराज इन्द्र के पास वापस चली जाऊँगी ।
वाह ... वाह ...। " परी रानी आपने तो कमाल कर दिया । अब देखो मैं इस पापी दुष्ट को कैसे तड़पा - तड़पाकर मारता हूँ । इसे इतनी आसानी से नहीं मारूँगा बल्कि इसके एक - एक जुल्म का हिसाब चुकाकर इसे मारूंगा । इतनी बात कहकर राजू ने उस काले पर्दे के पास जाकर तीन बार बोला - " जय काली । " " जय काली । " " जय काली । " बस उसी समय सामने से दीवार हट गई ।
अंधेरे में ही उसने सामने लटके हुए एक पिंजरे को देखा जिसके अंदर एक तोता बैठा था । राजू को देखते ही वह ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगा । राजू ने उसके चिल्लाने की कोई परवाह नहीं की और न ही वह उससे ज़रा भी डरा था । उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उस पिंजरे को अपने कब्ज़े में कर लिया लेकिन उसी समय " भंयकर आवाजें सुनाई दीं ।
धरती हिलने लगी । " " राजू के हाथ में पिंजरा जोर - ज़ोर से हिलने लगा । ' तोता भी बोलने लगा । " हुआ एक धुँए की लकीर में से काला देव प्रकट और ज़ोर - जोर से चिल्लाकर कहने लगा । “ छोड़ दो इस तोते को । ”यदि नहीं छोड़ेंगा तो क्या करोगे ? राजू ने भी अपने अंदाज़ में उत्तर दिया ।
मैं तुम सबको जला दूंगा । मेरी शक्ति को तुम नहीं जानते । मैं तुम्हें भस्म कर दूँगा । ' " हा ... हा ... हा ...। " " हा ... हा ...हड़क .... हा ... काले दींन ! तुम सबसे बड़े पापी हो , खूनी हो , ज़ालिम और संगदिल हो । अब तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते । तुम मुझे क्या मारोगे मैं ही तुम्हें मार डालूँगा , लेकिन इतनी आसानी से नहीं । तड़पा तड़पाकर मारूँगा ।
तुम्हारे एक - एक पापों का हिसाब करूँगा । तुम मेरे हाथ से अभी मरोगे , कल के छोकरे ! तुम मुझे मारोगे ? यह कहते हुए अपनी तलवार लेकर काला देव राजू का गला काटने के लिए दौड़ा तो ... तभी राजू ने झट से तोते की एक टाँग तोड़ डाली । उसी समय काले देव की भी एक टाँग टूटकर गिर गई किन्तु वह खूनी एक ही टाँग पर चलने लगा तो राजू ने तोते की दूसरी टाँग भी तोड़ दी ।
उसके साथ ही काले देव की दूसरी टाँग भी टूटकर गिर गई । ' क्यों ! कैसा लगा मेरा खेल ? " मैं तुम्हें अभी जलाकर भस्म कर दूँगा । " ' मैं जानता हूँ , इस परी ने ही तुम्हें यह सब बताया है ।
अब मैं तुम तीनों को जलाकर भस्म कर दूंगा । " राजू समझ गया था कि यह जादू की शक्ति से उन्हें जलाने का प्रयास करेगा । इसलिए उसने तोते का गला ही दबा दिया । इसके साथ ही काले देव का जीवन समाप्त हो गया । तीनों खुशी से झूम उठे । सफेद परी को मुक्ति मिल गई । उसने राजू और प्रीती को उनके घरों में छोड़ा और स्वयं देवराज इन्द्र के पास चली गई ।
