पूरी दुनिया में एक से बढ़कर एक प्रसिद्ध मंदिर हैं। कुछ अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं तो कुछ अपनी कलाकृति के लिए प्रसिद्ध हैं। कुछ प्रसिद्धि के लिए हैं तो कुछ भक्तों की आस्था के लिए। यह मंदिर हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था और आस्था का भी केंद्र है। हम आपको दुनिया के नटराज मंदिर सबसे बड़े मंदिरों के बारे में बताते हैं। इनमें से ज्यादातर मंदिर सिर्फ भारत में ही स्थित हैं...
नटराज मंदिर
तमिलनाडु के चिदंबरम में तिलई नटराज मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर है। इसकी सतह 106,000 वर्ग मीटर है। भगवान शिव के अलावा, शिवकामी अम्मन, गणेश, मुरुगा और गोविंदराजा पेरुलम की भी यहां पूजा की जाती है।
नटराज के पैरों के नीचे क्या है (nataraaj ke pairon ke neeche kya hai)
नटराज के पद्मासन आसन:नटराज के पैरों के नीचे एक विशिष्ट आधार होता है जिसे पद्मासन योगासन के रूप में जाना जाता है। इस आसन के अनुसार, व्यक्ति अपने दोनों पैरों को गुदाओं के बीच रखता है और उन्हें आरामदायक ढंग से फैलाता है। नटराज की प्रतिमा में भी वही पद्मासन आसन दिखाया गया है।
नटराज की मूर्ति का क्या अर्थ है (nataraaj kee moorti ka kya arth hai)
नटराज हिंदू धर्म की एक महत्वपूर्ण देवता शिव की एक रूप हैं। नटराज की मूर्ति शिव के चौबीस तंत्रों (देवी-देवताओं के गुरु बृहस्पति द्वारा लिखित अध्यात्मिक ग्रंथ) में वर्णित तंत्र में दर्शाई गई है।
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नटराज की मूर्ति शिव के सर्वोच्च तंत्रिक स्तरों के प्रतीक है जो जीवन और मृत्यु के समान शक्तिशाली तांत्रिक तत्वों का उपयोग करके सृष्टि और विनाश को नियंत्रित करते हैं। नटराज के बाजू में लिए गए डमरू (डमरु एक हिंदू वाद्य यंत्र है जो शिव के द्वारा वादित किया जाता है) सृष्टि के ध्वनि को दर्शाते हैं जबकि उनके दाहिने हाथ की पट्टी उनके द्वारा उन्मुक्त की गई जीवों के मुक्ति का प्रतीक है। नटराज की मूर्ति धर्म और तांत्रिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है और इसे शिव की सर्वश्रेष्ठता का प्रतीक माना जाता है।
नटराज किसका अवतार है (nataraaj kisaka avataar hai)
नटराज हिंदू धर्म के देवता शिव के एक रूप हैं। शिव के अनेक अवतार होते हैं, जिनमें से एक अवतार नटराज है। नटराज का अवतार शिव की तांत्रिक स्वरूपता को दर्शाता है, जो जीवन और मृत्यु के समान शक्तिशाली तांत्रिक तत्वों का उपयोग करके सृष्टि और विनाश को नियंत्रित करते हैं। नटराज भी शिव के उसी रूप का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए, हम कह सकते हैं कि नटराज शिव का एक विशेष अवतार हैं।
नटराज की मूर्ति कहाँ से मिली है (nataraaj kee moorti kahaan se milee hai)
नटराज की मूर्तियां भारत के विभिन्न स्थानों पर पाई जाती हैं। सबसे प्रसिद्ध नटराज की मूर्ति खजुराहो मंदिर में है, जो मध्य प्रदेश राज्य के छतरपुर जिले में स्थित है। यह मंदिर खजुराहो नामक छोटे शहर के पास है और यह भारतीय संस्कृति के एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों में से एक हैं
अन्य नटराज की मूर्तियां उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, असम, ओडिशा और राजस्थान जैसे अन्य राज्यों में भी मौजूद हैं। इन मूर्तियों का निर्माण अलग-अलग कार्यशैलियों और शैलियों में किया गया है।
नटराज का मतलब क्या होता है (nataraaj ka matalab kya hota hai)
नटराज शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है - "नट" और "राज"। "नट" का अर्थ होता है "रंगमंच पर नृत्य करने वाला" और "राज" का अर्थ होता है "राजा"। इसलिए, नटराज का शब्द शिव के नृत्यकला और राजत्व के संयोग को दर्शाता है।
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शिव को नटराज के रूप में दर्शाया जाता है जो अपने तांत्रिक नृत्य से सृष्टि, संहार और उत्थान को नियंत्रित करते हुए दिखते हैं। नटराज की मूर्ति जिस तरह से सभी दिशाओं में अपनी जंगी सृजनात्मक शक्ति को दर्शाती है, उससे उसका अर्थ यही होता है कि वह समस्त सृष्टि के विकास और उन्नति के लिए एक शक्तिशाली दिव्य तांत्रिक शक्ति है।
इसलिए, नटराज का मतलब होता है शिव के तांत्रिक नृत्य का दर्शन और उनके राजत्व का प्रतीक होना।
नटराज मंदिर किसने बनवाया (nataraaj mandir kisane banavaaya)
नटराज मंदिर तमिलनाडु में बनवाने का श्रेय चोल वंश के राजा चोल नामक राजा को जाता है। यह मंदिर चोल वंश के समय में बना था और अब यह तमिलनाडु के तिरुवालंचुर में स्थित है। इस मंदिर में नटराज की मूर्ति के अलावा अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हैं। यह मंदिर भारत के तमिलनाडु राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।
नटराज मंदिर कहां स्थित है (nataraaj mandir kahaan sthit hai)
नटराज मंदिर तमिलनाडु के तिरुवालंचुर नामक शहर में स्थित है। यह मंदिर चिदंबरम से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर है। तिरुवालंचुर तमिलनाडु में कांचीपुरम, तंजावुर और महाबलिपुरम जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के निकट स्थित है।
पत्थर की बनी नृत्य करते हुए पुरुष की मूर्ति नटराज किस स्थान पर पाई गई थी (patthar kee banee nrty karate hue purush kee moorti nataraaj kis sthaan par paee gaee thee)
पत्थर की बनी नृत्य करते हुए पुरुष की मूर्ति नटराज महाराष्ट्र राज्य के तन्जावुर जिले में स्थित बृहदीश्वर मंदिर में पाई जाती है। यह मंदिर तमिलनाडु कलाकृतियों की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण स्थान है और दक्षिण भारत की सबसे बड़ी हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर विश्व धरोहर स्थल के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।
भगवान नटराज की कथा क्या है (bhagavaan nataraaj kee katha kya hai)
भगवान नटराज की कथा हिंदू धर्म की एक प्रमुख कथाओं में से एक है। इस कथा में भगवान शिव का एक रूप दर्शाया गया है, जो कि नाट्य यानि नृत्य के देवता कहलाते हैं।
कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने अपने देवभूमि कैलास पर नृत्य करते हुए अपनी तांडव नृत्य का प्रदर्शन किया। इस नृत्य के दौरान उन्होंने अपने आसन पर जोतिर्लिंग को रचा दिया, जो नटराज के रूप में जाना जाता है। इस तरह नटराज को नृत्य शिव का स्वरूप माना जाता है।
नटराज की मूर्ति में शिव के चार हाथ होते हैं, जिनमें से दो उठाए हुए होते हैं और दो नीचे झुकाए हुए होते हैं। एक हाथ में डमरू होता है जो नाद को दर्शाता है और एक हाथ में अग्नि होती है जो उत्पत्ति को दर्शाती है।
नटराज की मूर्ति के अंगों में अनेक चिन्ह होते हैं जो शिव के विभिन्न अस्तित्वों को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, उनकी जांघ में त्रिशूल होता है जो निर्माण, संहार होता हैं.
नटराज मंदिर किसने बनवाया था (nataraaj mandir kisane banavaaya tha)
नटराज मंदिर तन्जावुर जिले के बृहदीश्वर मंदिर में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण राजा राजेन्द्र चोला द्वितीय द्वारा करवाया गया था, जो कि लगभग 1010 ईसा पूर्व में थे। इस मंदिर का निर्माण तमिलनाडु कलाकृति की उच्च कला का उत्कृष्ट उदाहरण है और यह भारतीय संस्कृति और धर्म के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थल है।
भगवान शिव को नटराज के नाम से क्यों जाना जाता है (bhagavaan shiv ko nataraaj ke naam se kyon jaana jaata hai)
भगवान शिव को नटराज के नाम से जाना जाता है क्योंकि उन्हें भगवान नटराज के रूप में भी जाना जाता है। नटराज का अर्थ होता है "नृत्य करने वाला भगवान" या "अद्भुत नृत्य करने वाला भगवान"। नटराज के रूप में भगवान शिव को दिखाया जाता है जो कि एक विशेष तांडव नृत्य करते हुए होते हुए दिखाई देते हैं। इस नृत्य को शिव का प्रतिबिंब माना जाता है जो जीवन और मृत्यु के चक्र को दर्शाता है और जिसे देखकर व्यक्ति मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का प्रयास करते हैं।
शिव नटराज किसका प्रतीक है (shiv nataraaj kisaka prateek hai)
शिव नटराज का प्रतीक वह दिखाई देता है जो उनके हाथ में डमरू और तांडव नृत्य करते हुए पांचवीं अंगुली पर खड़े एक पैर पर होते हुए दिखाई देते हैं। उनके दूसरे हाथ में एक त्रिशूल होता है और उनके सिर पर सर्प फनफनाते हुए दिखाई देते हैं। इस नृत्य को देखकर शिव के भक्तों को उनके जीवन और मृत्यु के चक्र का उदय और अस्त होना दिखाई देता है। इस प्रतीक के माध्यम से, शिव नटराज भगवान शिव की नृत्य कला को दर्शाता है, जिसे अद्भुत सौंदर्य और गति से संबोधित किया जाता है।
नटराज की मूर्ति के नीचे कौन है (nataraaj kee moorti ke neeche kaun hai)
नटराज की मूर्ति के नीचे एक दीर्घश्लोक होता है जो कि नट्य शास्त्र से लिया गया है। इस दीर्घश्लोक का अर्थ है:
"विश्वं दर्पण दृश्यमान नगरीतुल्यं निजान्तर्गतं पश्यन्नात्मनि मायया बहिरिवोद्भूतं यथा निद्रया। यः साक्षात्कुरुते प्रबोध समये स्वात्मानमेवाद्वयम् तस्मै श्री गुरुमूर्तये नम इदं श्रीदक्षिणामूर्तये।।"
इस दीर्घश्लोक में बताया गया है कि जैसे एक व्यक्ति नींद के समय अपनी माया से देखता है कि बाहर का जगत उसकी आत्मा के अंदर उत्पन्न होता है, उसी प्रकार विश्व भी हमारी आत्मा के अंदर ही उत्पन्न होता है। इसलिए हमें अपनी आत्मा को जानने की जरूरत होती है। इस दीर्घश्लोक के बाद अक्षरशः शंकराचार्य की महिमा का वर्णन किया जाता है जिन्हें श्री गुरुमूर्ति के रूप में पूजा जाता है।
नटराज की पूजा क्यों की जाती है (nataraaj kee pooja kyon kee jaatee hai)
नटराज की पूजा शिवभक्तों द्वारा की जाती है। नटराज की मूर्ति भगवान शिव के चौबीस रूपों में से एक है जो कि शिव के नृत्य का प्रतीक है। नटराज के नृत्य का वर्णन पुराणों में किया गया है जो इस नृत्य को दिव्य और अमूल्य मानते हैं। इसलिए, शिवभक्तों के बीच नटराज की पूजा बहुत महत्वपूर्ण होती है।
इसके अलावा, नटराज की मूर्ति के चारों तरफ कई तांत्रिक चिन्ह भी होते हैं जैसे कि पशु, पाश, विष, तंबाकू आदि। इन चिन्हों की सहायता से नटराज की पूजा के द्वारा भक्त अपने आत्मीय और भौतिक बल को बढ़ाने का प्रयास करते हैं।
शिवभक्तों के लिए, नटराज की पूजा से उन्हें अंतर्मन की शान्ति एवं शक्ति, सफलता, स्वस्थता आदि के लिए आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नटराज किसका अवतार है (nataraaj kisaka avataar hai)
नटराज भगवान शिव के एक अवतार के रूप में जाना जाता है। नटराज की मूर्ति भगवान शिव के नृत्य का प्रतीक है जो कि शांति और विनाश के साथ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और विनाश के चक्र को दर्शाता है। नटराज के नृत्य में जीवन और मृत्यु का संचार होता है जो कि समझ, शान्ति और मोक्ष के मार्ग को प्रदर्शित करता है। नटराज अवतार भगवान शिव के समस्त रूपों में से एक है जो भक्तों के द्वारा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
नटराज का मतलब क्या होता है (nataraaj ka matalab kya hota hai)
"नटराज" शब्द दो शब्दों से मिलकर बना होता है। "नट" शब्द नाचने वाले को दर्शाता है, जबकि "राज" शब्द राजा या शासक को दर्शाता है। इस प्रकार, "नटराज" का अर्थ होता है "नृत्य का राजा"। इसे भगवान शिव के एक अवतार के रूप में जाना जाता है, जिनका नृत्य संसार की उत्पत्ति, संरचना और विनाश को दर्शाता है। नटराज के नृत्य में जीवन और मृत्यु का संचार होता है जो कि समझ, शान्ति और मोक्ष के मार्ग को प्रदर्शित करता है। इस प्रकार, नटराज शब्द भगवान शिव के नृत्य के एक विशिष्ट प्रतीक को दर्शाता है।
नटराज की मूर्ति क्यों नहीं रखनी चाहिए (nataraaj kee moorti kyon nahin rakhanee chaahie)
नटराज की मूर्ति को रखना या नहीं रखना धर्म और आचार्यों की मताधिकार होती है। कुछ संस्कृति में, नटराज की मूर्ति को पूजने का विशेष महत्व नहीं दिया जाता है। वे लोग इसे एक कलात्मक वस्तु के रूप में देखते हैं जो आत्मिक उन्नति या मुक्ति के लिए एक प्रेरणा के रूप में कार्य करती है।
दूसरी ओर, कुछ संस्कृति में नटराज की मूर्ति को श्रद्धा और पूजनीय माना जाता है। इसे मंदिरों और गृहों में स्थापित किया जाता है और इसे पूजने का विशेष महत्व दिया जाता है।
इसलिए, नटराज की मूर्ति को रखना या नहीं रखना व्यक्ति की आस्था और विश्वास पर निर्भर करता है। यदि कोई व्यक्ति चाहता है कि उन्हें नटराज की मूर्ति पूजनीय माना जाए तो वह इसे पूजा और अर्चना के लिए उपयुक्त ढंग से स्थापित कर सकता है।
