मां पार्वती माताजी मंदिर- यह स्थान मंडलेश्वर-महो मार्ग पर विंध्याचल श्रेणी में स्थित है।
दुनिया में कई धार्मिक स्थल हैं और हर मंदिर की अपनी एक अलग मान्यता है। इसी तरह इंदौर से करीब 50 किमी दूर विंध्याचल रेंज के घने जंगल में करीब 3 हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर एक मंदिर (पार्वती मंदिर जाम घाट) भी है।
मां पार्वती माताजी मंदिर, जामघाट
यह मंदिर माता पार्वती (पार्वती माता मंदिर) का है जो एक अष्टकोणीय मूर्ति है। यह मंदिर एक हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। जाम खुर्द गांव पर पार्वती बांध जाम घाट में है। यह महू-मंडलेश्वर मार्ग से आती है। मंदिर परिसर एक हेक्टेयर से अधिक में फैला हुआ है।
राम वैकुंठ मन्दिर की कहानी Rama Baikunth temple
इंदौर से महू होते हुए बड़गोंडा, मेन होते हुए पहुंचा जा सकता है। इस मंदिर के अध्यक्ष रामेश्वर पटेल और उपाध्यक्ष कैलाश पाटीदार हैं। करीब 20 लाख की धनराशि और ग्रामीणों के भरोसे से मंदिर का निर्माण हो रहा है।
Parvati Mata Mandir: पार्वती माता का मंदिर घने जंगलों के बीच 3000 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है
यह निर्माण कार्य करीब चार-पांच साल से चल रहा है, जिसके तहत 6000 वर्गफीट क्षेत्र में माता पार्वती का तीन मंजिला मंदिर बनना है। स्कंद पुराण के उल्लेख के अनुसार राजा इंद्र ने यहां मूर्ति स्थापित की थी। इस मंदिर में देवी पार्वती की मूर्ति को महिषासुर का वध करते हुए दिखाया गया है। माता रानी की पत्थर की मूर्ति पांच फीट ऊंची और बेहद आकर्षक है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं और मां उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं।
माता पार्वती हर मनोकामना पूर्ण करती हैं
पुजारी गोरधन शर्मा ने बताया कि गांव की महिला का बच्चा 15 साल से लापता है, सभी ने उसके मिलने की उम्मीद छोड़ दी है, लेकिन मंदिर आने के बाद महिला ने मन्नत मानी और एक महीने बाद ही कार्ड के माध्यम से बच्चे को जन्म दिया. बच्चे की जानकारी मिली, फोटो व पता लिखा, परिजन उसे लेने गए। तभी से मंदिर में सभी की मनोकामना पूरी होती है। इतना ही नहीं बरसों से जिनके सीने खाली हैं, उनके भी सीने मां के आशीर्वाद से भरे हुए हैं.
माँ 3 बार बदलती है
मंदिर के पुजारी गोवर्धन शर्मा ने बताया कि नवरात्र में श्रद्धालुओं को प्रतिदिन सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक खिचड़ी और चाय पिलाई जाती है. नवरात्रि में यहां प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कहा जाता है कि देवी पार्वती दिन में तीन बार यहां अपना रूप बदलती हैं। गोरधन शर्मा की कई पीढ़ियां इस मंदिर में पुजारी रही हैं और करीब 40 साल हो गए हैं जब गोरधन शर्मा भी इस मंदिर में पूजा करते हैं। कहा जाता है कि यह मंदिर 500 साल से भी ज्यादा पुराना है।
देवी पार्वती के बारें में और भी जानकारियां :
भारत में कितने पार्वती मंदिर हैं (bhaarat mein kitane paarvatee mandir hain)
भारत में कई पार्वती मंदिर हैं। इनमें से कुछ धार्मिक महत्व के साथ संबंधित हैं और कुछ अन्य मंदिरों को केवल पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है। इसलिए इसका सटीक जवाब देना थोड़ा मुश्किल है।
हालांकि, कुछ प्रसिद्ध पार्वती मंदिर निम्नलिखित हैं:
- अमरनाथ मंदिर, जम्मू और कश्मीर
- केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड
- वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू और कश्मीर
- ज्वालामुखी मंदिर, हिमाचल प्रदेश
- चमुंडा देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश
- नैना देवी मंदिर, उत्तराखंड
- गौरीशंकर मंदिर, हिमाचल प्रदेश
इसके अलावा भी अनेक पार्वती मंदिर हो सकते हैं जो अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं।
पार्वती जी का गांव कौन सा है (paarvatee jee ka gaanv kaun sa hai)
पार्वती जी एक हिंदू देवी हैं और उन्हें भारतीय पौराणिक कथाओं में शिव और पार्वती की पत्नी के रूप में जाना जाता है। पार्वती जी का कोई गांव नहीं है।
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हालांकि, पार्वती जी के भक्त उन्हें समर्पित कुछ स्थानों को उनके गांव के रूप में जानते हैं। उनमें से एक है शिमला जिले में स्थित तटा पणि गांव जो पार्वती जी को समर्पित है। यहां पर एक प्राचीन मंदिर है जो पार्वती जी को समर्पित है।
पार्वती मंदिर किसने बनवाया था (paarvatee mandir kisane banavaaya tha)
भारत में कई पार्वती मंदिर हैं और उन्हें बनवाने वाले लोगों के बारे में बताना मुश्किल हो सकता है क्योंकि इन मंदिरों का इतिहास बहुत पुराना हो सकता है। हालांकि, अधिकांश मंदिरों के निर्माण का श्रेय स्थानीय राजा, सम्राट या धार्मिक संगठनों को जाता है।
जैसे कि, उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ मंदिर पार्वती जी को समर्पित है और इसे आदि शंकराचार्य ने बनवाया था। ज्वालामुखी मंदिर, हिमाचल प्रदेश में स्थित है जो भगवती पार्वती को समर्पित है और इसे बस्तर राजा अहिराज ने बनवाया था।
कुछ मंदिरों का इतिहास वैदिक काल तक जाता है जैसे कि वैष्णो देवी मंदिर, जो उत्तराखंड में स्थित है। इसलिए, सटीक जवाब देना मुश्किल होता है कि किसने कौन सा पार्वती मंदिर बनवाया है।
पार्वती का असली नाम क्या है (paarvatee ka asalee naam kya hai)
पार्वती का असली नाम हिमावती भी है। उन्हें इस नाम से भी जाना जाता है। पार्वती जी को भारतीय पौराणिक कथाओं में महादेव और पार्वती की पत्नी के रूप में जाना जाता है। उनकी कहानियों में वे एक बहुत ही सुंदर व शक्तिशाली देवी के रूप में वर्णित की जाती हैं।
पार्वती जी कौन सी जाति की थी (paarvatee jee kaun see jaati kee thee)
पार्वती जी की जाति के बारे में कोई निश्चित जानकारी नहीं है। हिंदू धर्म में, देवी और देवताओं की जाति की परवाह नहीं की जाती है। वे सर्वभूत स्वरूप होती हैं और सभी जातियों और वर्णों के लोग उनकी पूजा करते हैं।
हालांकि, पार्वती जी के माता-पिता का उल्लेख ब्राह्मण या क्षत्रिय जाति से किया गया है। उनकी माता का नाम मेना था जो हिमालय की राजकुमारी थीं और उनके पिता का नाम हिमवान था जो हिमालय का राजा था।
भारत में महादेव का सबसे बड़ा मंदिर कौन सा है (bhaarat mein mahaadev ka sabase bada mandir kaun sa hai)
भारत में महादेव के कई मंदिर हैं जिनमें से कुछ बहुत ही प्रसिद्ध हैं। महादेव के सबसे बड़े मंदिरों में से कुछ निम्नलिखित हैं:
केदारनाथ मंदिर: उत्तराखंड राज्य के केदारनाथ श्रृंगार में स्थित यह मंदिर महादेव के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और महादेव की त्रिपुण्ड्रु रूप की पूजा की जाती है।
अमरनाथ मंदिर: जम्मू और कश्मीर राज्य में स्थित इस मंदिर में महादेव के लिए एक बर्फीले गुफा में शिवलिंग पूजा की जाती है। यह भी बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
महाकालेश्वर मंदिर: मध्य प्रदेश राज्य के उज्जैन शहर में स्थित यह मंदिर महादेव के बहुत ही प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में महादेव की भैरव रूप की पूजा की जाती है।
ये कुछ उन मंदिरों में से हैं जो महादेव के सबसे बड़े मंदिरों में से हैं।
विश्व का सबसे ऊंचा महादेव मंदिर कौन सा है (vishv ka sabase ooncha mahaadev mandir kaun sa hai)
विश्व का सबसे ऊँचा महादेव मंदिर "केदारनाथ मंदिर" है, जो भारत के उत्तराखंड राज्य में हिमालय की पहाड़ियों में स्थित है। यह मंदिर लगभग 3583 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। केदारनाथ मंदिर में महादेव की त्रिपुंड्रु रूप की पूजा की जाती है।
