| चित्रकार को क्यों घमंड हुआ |
ग्रीस में ज्यूक नाम का एक प्रसिद्ध चित्रकार रहता था । वह फल फूलों के इतने सजीव चित्र बना दिया करता था कि देखने वाले धोखा खा जाते थे । एक बार उसने सेबों के चित्र बनाए । वे इतने ज्यादा सजीव लगते थे कि देखने वाले पहचानने में गलती कर बैठते ।
यहाँ तक कि बाहर से चिड़िया उड़कर अंदर आई और उन्हें सचमुच का सेब समझ , चोंच मारकर खाने की कोशिश करने लगी । यह देख ज्यूक खुशी से फूला न समाया । अन्य सभी लोगों ने भी उसकी खूब प्रशंसा की । कहा कि उसने एक अद्भुत चित्र बनाया है ।
अपने चित्रों की इतनी तारीफ सुनकर , धीरे - धीरे ज्यूक घमंडी होता चला गया । वह समझने लगा कि संसार में उससे ज्यादा अच्छा चित्रकार न कभी था , न है , और न होगा । उसी शहर में परस नामक एक अन्य चित्रकार भी रहता था । वह भी बहुत सुंदर व सजीव चित्र बनाता था , परन्तु उसे अपनी चित्र - कला पर कोई घमंड नहीं था ।
ज्यूक की चित्र - कला एवं उसके घमंड के विषय में भी परस ने सुन रखा था । ने ज्यूक ने स्वयं को संसार का सर्वश्रेष्ठ चित्रकार मान रखा है , यह सुनकर परस ने निश्चय किया कि वह भी एक चित्र बनाएगा । फिर ज्यूक को अपना चित्र दिखाने के लिए अपने घर बुलाएगा ।
एक परस ने एक भोले - भाले लड़के का चित्र बनाया । उसके आगे खूबसूरत जालीदार पर्दा भी पेंट किया । चित्र को देखकर लगता था , मानो लड़के की पेंटिंग को पर्दे से ढक दिया गया हो । चित्र पूरा बनने के बाद परस ने विनय पूर्वक ज्यूक को अपने घर आमंत्रित किया । ज्यूक ने सहर्ष उसका निमंत्रण स्वीकार किया और परस के घर जा पहुँचा ।
परस ने उसे चित्र दिखाया तो थोड़ी देर वह उसे देखता रहा । फिर बोला- " चित्र के आगे से यह पर्दा हटाओ ताकि चित्र स्पष्ट दिखाई दे सके । इस पर परस ने मुसकराकर कहा- " यह कोई वास्तविक पर्दा नहीं है । यह तो चित्र में ही बना है । " यह सुनकर ज्यूक की गर्दन शर्म से झुक गई । वह परस से बोला " तुम तो मुझसे भी बड़े चित्रकार निकले । पक्षी नासमझ होते हैं जो मेरे चित्रों को देखकर धोखा खा जाते हैं
परन्तु मैं तो एक सफल चित्रकार होते हुए भी असली और नकली पर्दे का भेद नहीं पहचान पाया । तुमने मुझे अच्छी सीख दी है , अब मैं कभी घमंड नहीं करूँगा । " इतना सब कहने के बाद भी ज्यूक के मन में बहुत ईर्ष्या जागी । उसने एक तसवीर बनाई । उसमें एक बच्चा हाथ में अंगूरों का गुच्छा लिए खड़ा था । तसवीर की सजीवता देख लोग वाह - वाह कर उठे । बाहर से चिड़िया उड़कर आई और अंगूरों के गुच्छे पर चोंच मारकर खाने का प्रयास करने लगी ।
यह देखकर ज्यूक उदास हो गया । लोगों ने उसकी उदासी का कारण पूछा , तो वह बोला- " आमतौर से चिड़िया बच्चों को देखकर उड़ जाती हैं । लेकिन मेरे बनाए चित्र में लड़के की ओर चिड़िया का ध्यान ही नहीं है , जबकि वह अंगूरों को समझ रही है । मेरी कला में अभी बहुत कमी है ।
यही कारण है में चित्र में बने लड़के को वास्तविक न बना पाया । शायद मुझे अभी अभ्यास की बहुत जरूरत है । " उस दिन से ज्यूक ने घमंड करना छोड़ दिया और वास्तविक से नए से नए चित्र बनाने में जुट गया