हिमालय की गोद में बसे नेपाल और भूटान के बीच सिक्किम का राज्य अपनी सुंदरता के कारण लुभा रहा था । चारों ओर हरे - भरे पेड़ और फूलों से लदी हुई डालियाँ महकती रहती थीं , जिन पर रंग - बिरंगे पक्षी उड़ते रहते थे । उन्हीं जंगलों में सिक्किम की वीर बालाएँ सुंदर हिरनियाँ- सी लकड़ियाँ अथवा औषधियाँ लेने जातीं , तो अपने जूड़े में एक छोटी - सी छुरी खोंसकर घर से निकलतीं । उनकी यह छोटी छुरी वन - पशुओं से बचने और जड़ी - बूटियाँ एकत्र करने में सहायक होती ।
बात उन दिनों की है , जब अंग्रेजों का अधिकार सिक्किम पर भी था । उसी समय प्रतापसिंह नाम के एक सरकारी अधिकारी अपनी वीरता के लिए बहुत प्रसिद्ध थे । उनकी बेटी चम्पा बहुत सुन्दर थी । चम्पा को खुले जंगल में घूमना बहुत पसंद था । वह भी अपने जूड़े में छोटी छुरी खोंसकर वन में दूर चली जाती और वहाँ से सुंदर - सुंदर फूल चुनकर लाती । उन फूलों के गुलदस्ते बनाकर वह बेहद खुश होती ।
उसके बालों का जूड़ा सदा सुंदर - सुंदर फूलों से महकता रहता था । एक दिन चम्पा अपनी छोटी बहन मुग्धा के साथ वन में गई । उस दिन मौसम बड़ा सुहाना था । वे दोनों बहनें इधर से उधर दौड़ती हुई खेल में लग गईं । एक अंग्रेज वहाँ झाड़ी के पीछे छिपा , दोनों लड़कियों को देखता रहा था । वह चम्पा के रूप पर मोहित हो गया । उसने झाड़ी से बाहर आकर चम्पा को पुकारा । भोली - भाली चम्पा उसके पास जाकर खड़ी हो गई ।
वह अंग्रेज एकटक चम्पा को देखने लगा । यह बात चम्पा को अच्छी नहीं लगी । वह पीछे लौटने लगी , तभी अंग्रेज ने कहा- " जाओ मत , रुको । तुम नहीं जानतीं कि मैं यहाँ का अफसर हूँ । मैं तुमको पसंद करता हूँ । तुम मेरे बंगले पर चलो और सुख से रहो । " चंचल चम्पा का चेहरा बुझ - सा गया । अब उसकी समझ में आ गया कि अंग्रेज अफसर दुष्ट है ।
अतः उसने कहा- " तुम्हें मुझ से ऐसी बातें कहते लज्जा नहीं आती ? " अंग्रेज तो अपनी शान में अंधा हो रहा था । उसने लपककर चम्पा का हाथ पकड़ लिया । दूसरे ही क्षण चम्पा एक झटके से हाथ छुड़ाकर गरजती हुई बोली- " साहब बहादुर ! अब जरा भी आगे बढ़े , तो खबरदार । " अंग्रेज साहब के सिर पर मौत खेल रही थी । उसे लगता था कि एक साधारण लड़की उसका कर ही क्या सकती है । उसने चम्पा का हाथ फिर कसकर पकड़ लिया ।
अतः चम्पा ने बाएँ हाथ से अपने जूड़े की छुरी निकालकर उस अंग्रेज की छाती में भोंक दी । अंग्रेज भूमि पर गिरकर तड़पने लगा । चम्पा अपनी बहन मुग्धा के साथ घर लौटी । उसकी छोटी बहन मुग्धा ने अपने पिता से सारी बातें कहीं । इतने में बहुत से अंग्रेज घोड़ों पर चढ़ आए और उन्होंने चम्पा के पिता का घर ' चारों ओर से घेर लिया । उस घायल अंग्रेज ने अपने साथियों को बताया था कि प्रतापसिंह की लड़की ने बिना कारण ही उसे मारा है । उसके पिता का घर अंग्रेजों ने घेर लिया है ,
यह देखकर चम्पा को बहुत क्रोध आया । वह सिंहनी की तरह अपनी छुरी लेकर निकल पड़ी और उन अंग्रेजों को ललकारते हुए बोली- " मैंने तुम्हारे दुष्ट साथी को मारा है । जो भी दुष्टता करेगा , मेरी छुरी प्यासी नागिन की तरह उसका रक्त पी लेगी । " अंग्रेज एक बालिका का यह साहस और रौद्र रूप देखकर चकित हो गए । जब उन लोगों को पूरी बात का पता चला , तब वे सब बगैर कुछ बोले चुपचाप वहाँ से लौट गए ।